सीएम भजनलाल शर्मा बोले- ईश्वर ही सबकुछ तय करता है, युवाओं को सुंदरकांड पढ़ने की दी सलाह जोधपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ईश्वर में अपनी आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि उनका मानना है कि जीवन में क्या होना है और व्यक्ति को कहां जाना है, यह सब ईश्वर तय करता है। शनिवार को जोधपुर के बावड़ी स्थित रघुवंशपुर आश्रम में आयोजित रामकथा में शामिल हुए मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में धर्म, आस्था और रामायण के महत्व पर विचार रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह ईश्वरवादी हैं और उनका विश्वास है कि जीवन में होने वाली घटनाएं ईश्वर की इच्छा से तय होती हैं। उनके मुताबिक, यह विश्वास व्यक्ति को मानसिक सुकून देता है और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने में मदद करता है। रामकथा में शामिल होने का सुनाया अनुभव कार्यक्रम के दौरान भजनलाल शर्मा ने रामकथा और भागवत जैसे धार्मिक आयोजनों के प्रति अपने जुड़ाव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पहले जब उन्हें किसी गांव में रामकथा या भागवत के आयोजन की जानकारी मिलती थी, तो वह कई बार बिना औपचारिक निमंत्रण के भी वहां पहुंच जाते थे। मुख्यमंत्री के इस संबोधन में धार्मिक आयोजनों के प्रति उनकी व्यक्तिगत आस्था और जुड़ाव दिखाई दिया। आश्रम में आयोजित रामकथा में उन्होंने आमजन को संबोधित करते हुए धर्मग्रंथों से जुड़ने की बात कही। युवाओं को सुंदरकांड पढ़ने की सलाह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने युवाओं से रामायण पढ़ने के लिए समय निकालने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं के पास पूरी रामायण पढ़ने का समय नहीं है, तो उन्हें सुंदरकांड जरूर पढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, सुंदरकांड में जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण संदेश मिलते हैं। मुख्यमंत्री की यह अपील युवाओं को भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने के संदर्भ में थी। सुंदरकांड रामचरितमानस का एक महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें हनुमान जी की लंका यात्रा, सीता माता से भेंट और भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति का वर्णन मिलता है। आस्था और धार्मिक परंपराओं पर दिया जोर बावड़ी स्थित रघुवंशपुर आश्रम में आयोजित रामकथा के दौरान मुख्यमंत्री का संबोधन धार्मिक आस्था और रामायण के संदेशों पर केंद्रित रहा। उन्होंने अपने विश्वास को साझा करते हुए कहा कि ईश्वर में आस्था रखने से मन को शांति मिलती है। कार्यक्रम में युवाओं को सुंदरकांड पढ़ने की सलाह और रामकथा से जुड़े अपने अनुभव साझा करना उनके संबोधन के प्रमुख बिंदु रहे।