जोधपुर जिला परिषद चुनाव: 43 वार्डों में 195 उम्मीदवार मैदान में, मदेरणा परिवार ने बनाई दूरी जोधपुर: राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव को लेकर जोधपुर जिले में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जिला परिषद के 43 वार्डों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो गई है। कुल 195 उम्मीदवारों ने 208 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। भाजपा, कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) और निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनावी मैदान में अपनी दावेदारी पेश की है। इस बार के चुनाव में एक अहम बात यह है कि मदेरणा परिवार से जिला परिषद सदस्य के लिए कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरा है। लंबे समय से जोधपुर की राजनीति में सक्रिय रहे इस परिवार की जिला परिषद चुनाव में गैरमौजूदगी को राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। वार्ड 18 से चुनाव लड़ेंगे भाजपा देहात जिलाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी के देहात जिलाध्यक्ष त्रिभुवन सिंह भाटी ने वार्ड संख्या 18 से जिला परिषद सदस्य के लिए नामांकन दाखिल किया है। भाटी के अनुसार, उन्होंने पार्टी के निर्देश पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उन्होंने जिला प्रमुख बनने की दावेदारी भी जताई है। चुनाव लड़ने के साथ संगठन की जिम्मेदारियां निभाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि संगठन का काम भी जारी रहेगा। सरकारी नौकरी छोड़कर चुनावी मैदान में उतरीं निरमा विश्नोई स्वास्थ्य विभाग में एएनएम के पद पर कार्यरत रहीं निरमा विश्नोई ने सरकारी सेवा छोड़कर राजनीति में कदम रखा है। उन्होंने भाजपा के टिकट पर वार्ड संख्या 25 से नामांकन दाखिल किया है। निरमा विश्नोई का कहना है कि वह जनता की सेवा और क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से चुनाव लड़ रही हैं। ओसियां में दिव्या मदेरणा की भूमिका चर्चा में ओसियां की पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा पंचायत समिति चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन में सक्रिय हैं। खबर के अनुसार, ओसियां क्षेत्र के जिला परिषद वार्डों में भी प्रत्याशियों के चयन में उनकी सिफारिश की भूमिका रही है। दिव्या मदेरणा ने एक वीडियो में कार्यकर्ताओं के मूल्यांकन के आधार पर टिकट देने की बात कही थी। ऐसे में जिला परिषद चुनाव में मदेरणा परिवार का कोई सदस्य उम्मीदवार नहीं होने के बावजूद क्षेत्र की राजनीति में परिवार की भूमिका पर चर्चा जारी है। 1953 से राजनीति में सक्रिय रहा है मदेरणा परिवार मदेरणा परिवार का जोधपुर जिले की राजनीति में लंबा इतिहास रहा है। परिवार के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय परसराम मदेरणा वर्ष 1953 में चाडी गांव के सरपंच चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक विधायक के रूप में भी काम किया। उनके पुत्र महिपाल मदेरणा ने पंचायत राज व्यवस्था से राजनीतिक सफर शुरू किया। वर्ष 1982 में जिला परिषद सदस्य बनने के बाद वह जिला प्रमुख बने और वर्ष 2003 तक इस पद पर रहे। बाद में लीला मदेरणा जिला परिषद से जुड़ीं और पिछले जिला परिषद चुनाव में जिला प्रमुख बनीं। दिव्या मदेरणा भी विधायक बनने से पहले जिला परिषद सदस्य रह चुकी हैं। इस बार परिवार से किसी सदस्य का जिला परिषद चुनाव नहीं लड़ना स्थानीय राजनीति का प्रमुख घटनाक्रम माना जा रहा है। नामांकन पत्रों की जांच आज नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब निर्वाचन प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होगा। जिला परिषद उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच 14 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। इसके बाद नाम वापसी और चुनाव चिह्न आवंटन की प्रक्रिया होगी। अब सभी की नजर नामांकन जांच के बाद उम्मीदवारों की अंतिम सूची और विभिन्न वार्डों में बनने वाले चुनावी मुकाबलों पर रहेगी।