डेढ़ महीने के नवजात ने गंभीर टिटेनस को दी मात, MDM अस्पताल की टीम ने बचाई जान जोधपुर के मथुरादास माथुर (MDM) अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने गंभीर टिटेनस संक्रमण से जूझ रहे महज डेढ़ महीने के नवजात का सफल इलाज कर उसकी जान बचाई। जन्म के कुछ दिन बाद बच्चे की हालत तेजी से बिगड़ गई थी। उसे लगातार ऐंठन, जबड़े में जकड़न और सांस लेने में परेशानी जैसी गंभीर समस्याएं होने लगी थीं। करीब डेढ़ महीने तक चले इलाज, लगातार निगरानी और रेस्पिरेटरी सपोर्ट के बाद बच्चे की हालत में सुधार हुआ। स्वस्थ होने पर उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अस्वच्छ तरीके से नाल काटने के बाद संक्रमण की आशंका एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बीएस जोधा के अनुसार, बच्चे का जन्म घर पर हुआ था और जन्म के समय उसका वजन करीब 2.4 किलोग्राम था। अस्पताल के अनुसार, प्रसव के दौरान नाल काटने के लिए इस्तेमाल की गई ब्लेड स्टरलाइज्ड नहीं थी। इसके बाद नवजात में गंभीर टिटेनस संक्रमण विकसित हुआ, जिसे सीवियर नियोनेटल टिटेनस के रूप में बताया गया है। सातवें दिन बिगड़ी हालत, NICU में भर्ती जन्म के सातवें दिन बच्चे की स्थिति अचानक ज्यादा गंभीर हो गई। उसे शरीर में तेज ऐंठन और स्पॉसम्स होने लगे। इसके साथ ही उसके जबड़े में जकड़न और सांस लेने में काफी परेशानी सामने आई। गंभीर हालत को देखते हुए परिजन उसे MDM अस्पताल की जनाना विंग-4 के NICU लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया। करीब 15 दिन तक दिया गया रेस्पिरेटरी सपोर्ट शिशु रोग विभाग की यूनिट-6 के प्रमुख डॉ. हरीश मौर्य, सहायक प्रोफेसर डॉ. विकास आर्य और NICU इंचार्ज सीमा पूरी के नेतृत्व में बच्चे का इलाज किया गया। टीम में डॉ. हर्षित, डॉ. करण, डॉ. वेदांत, डॉ. रिया और डॉ. सोनल भी शामिल रहे। इलाज के दौरान बच्चे को करीब 15 दिनों तक CPAP मशीन के जरिए सांस लेने में सहायता दी गई। इसके बाद उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आने लगा और ऑक्सीजन सपोर्ट कम किया गया। 15 दिन बाद शुरू हुई फीडिंग डॉक्टरों के अनुसार, अस्पताल में भर्ती होने के करीब 15 दिन बाद बच्चे को धीरे-धीरे फीडिंग शुरू कराई गई। इसके बाद उसकी स्थिति में लगातार सुधार दर्ज किया गया। करीब एक महीने से ज्यादा समय तक चले उपचार के बाद नवजात ने संक्रमण और उससे जुड़ी गंभीर समस्याओं से उबरने में सफलता हासिल की। लगभग 1 महीने 17 दिन के उपचार के बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ स्थिति में पहुंचा और उसे सुरक्षित रूप से अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अस्पताल प्रशासन ने टीम की सराहना की नवजात के स्वस्थ होकर घर लौटने पर MDM अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित ने इलाज में शामिल डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की सराहना की। उन्होंने कठिन स्थिति में लगातार निगरानी और उपचार के जरिए बच्चे को स्वस्थ करने वाली पूरी टीम को बधाई दी। नवजात टिटेनस से बचाव में स्वच्छता बेहद जरूरी नवजात में टिटेनस संक्रमण गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। इस मामले ने प्रसव के दौरान स्वच्छता और संक्रमण से बचाव के उपायों के महत्व को भी सामने रखा है। बच्चे की नाल काटने के लिए साफ और सुरक्षित उपकरणों का इस्तेमाल करना तथा प्रसव के दौरान उचित चिकित्सकीय सावधानियां बरतना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।