राजस्थान में सूखे के हालात पर गहलोत ने सरकार को घेरा, बोले- समय रहते कदम नहीं उठाए तो बढ़ेगी परेशानी जोधपुर/जैसलमेर। राजस्थान में सूखे और अकाल की आशंका को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर और आसपास के क्षेत्रों में हालात को गंभीर बताते हुए भजनलाल शर्मा सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। गहलोत इन इलाकों में सूखे की स्थिति का जायजा लेने के लिए तीन दिवसीय दौरे पर रवाना हुए। मीडिया से बातचीत में गहलोत ने कहा कि प्रदेश में इस बार सूखे का असर कितना व्यापक है, इसका आकलन सरकार को गंभीरता से करना चाहिए। उनके मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में लोग परेशान हैं और बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर तथा जोधपुर समेत कई जिलों में पानी और पशुओं के चारे की समस्या सामने आ रही है। चारे और पेयजल संकट पर जताई चिंता अशोक गहलोत ने दावा किया कि जैसलमेर में बड़ी संख्या में गायों की मौत हुई है। उन्होंने पशुधन के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था नहीं होने और चारे की कीमत करीब 20 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात कही। गहलोत ने यह भी कहा कि कई क्षेत्रों में पेयजल संकट बढ़ रहा है, जिससे ग्रामीणों और पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इन दावों के संबंध में प्रभावित क्षेत्रों के आधिकारिक आंकड़ों और प्रशासनिक रिपोर्टों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। गिरदावरी जल्द पूरी कराने की मांग पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार से प्रभावित इलाकों में फसल गिरदावरी की प्रक्रिया जल्द पूरी कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सूखे से हुए नुकसान का सही आकलन समय पर होना चाहिए, ताकि जरूरतमंद किसानों और पशुपालकों तक राहत पहुंचाने में देरी न हो। गहलोत के अनुसार, केवल घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। सरकार को गांवों में जाकर स्थिति का आकलन करना चाहिए और पेयजल, पशुचारे तथा रोजगार से जुड़े इंतजाम पहले से करने चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री स्तर पर सूखे की नियमित निगरानी की जरूरत भी बताई। केंद्र सरकार से मदद मांगने की अपील गहलोत ने राज्य सरकार से केंद्र के सामने सूखे और अकाल राहत के लिए सहायता का मुद्दा उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि राहत कार्यों की तैयारी समय रहते शुरू होनी चाहिए, क्योंकि संकट बढ़ने के बाद व्यवस्थाएं करने में परेशानी हो सकती है। अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार ने सूखे की स्थिति में 16 अगस्त से राहत कार्य शुरू किए थे। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में संचालित काम के बदले अनाज योजना का भी जिक्र किया। गहलोत ने सवाल उठाया कि राजस्थान में राज्य और केंद्र में एक ही गठबंधन की सरकार होने के बावजूद सूखे से निपटने के लिए केंद्र से सहायता मांगने की पहल क्यों नहीं की जा रही है। सूखे की स्थिति पर अब प्रशासनिक कदम अहम पश्चिमी राजस्थान के सूखा प्रभावित बताए जा रहे इलाकों में पानी की उपलब्धता, पशुओं के लिए चारा, फसल नुकसान और ग्रामीण रोजगार जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। गहलोत ने इन विषयों पर सरकार से सक्रियता बढ़ाने की मांग की है। हालांकि, सूखे की वास्तविक गंभीरता, प्रभावित गांवों की संख्या और राहत की जरूरत का आकलन सरकारी सर्वेक्षण तथा आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर किया जाना जरूरी है। फिलहाल, गहलोत के बयान ने राजस्थान में सूखे की स्थिति और उससे निपटने की तैयारियों को लेकर राजनीतिक बहस को फिर सामने ला दिया है।