राजस्थान का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में गर्म रेत, तेज धूप और 45 से 50 डिग्री तक पहुंचने वाला तापमान आ जाता है. ऐसे मौसम में ज्यादातर लोग ठंडी चीजें खाने की सोचते हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि राजस्थान के कई इलाकों में लोग आज भी भरपूर मिर्च वाला खाना बड़े चाव से खाते हैं. लाल मिर्च, हरी मिर्च और मसालेदार सब्जियां वहां के खाने का अहम हिस्सा मानी जाती हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि इतनी गर्मी में आखिर तीखा खाना कैसे खाया जाता है और क्या सच में मिर्च शरीर को ठंडा रखने में मदद करती है?
असल में इसके पीछे सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि शरीर की एक खास प्रक्रिया भी जुड़ी हुई मानी जाती है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि मिर्च में “कैप्साइसिन” नाम का एक कंपाउंड पाया जाता है. यही चीज मिर्च को तीखा बनाती है. जब हम तीखा खाना खाते हैं, तो शरीर का तापमान बढ़ा हुआ महसूस होता है और पसीना ज्यादा आने लगता है. यह पसीना बाद में शरीर को ठंडा करने में मदद करता है. यानी शरीर खुद को कूल करने की कोशिश करता है. इसी वजह से कई गर्म देशों में मसालेदार खाना आम माना जाता है.
राजस्थान जैसे इलाकों में जहां मौसम बहुत ज्यादा गर्म और सूखा रहता है, वहां के लोगों की खानपान की आदतें भी उसी हिसाब से विकसित हुई हैं. वहां लोग बचपन से ही मसालेदार खाना खाते हुए बड़े होते हैं, इसलिए उनका शरीर भी धीरे-धीरे उस स्वाद और गर्मी के अनुसार खुद को ढाल लेता है. यही कारण है कि जो खाना बाहर के लोगों को बहुत तीखा लगता है, वही वहां के लोगों के लिए सामान्य माना जाता है.
राजस्थानी खाने में सिर्फ मिर्च ही नहीं बल्कि घी, छाछ, बाजरे की रोटी और दही जैसी चीजें भी खूब खाई जाती हैं. ये चीजें शरीर को संतुलित रखने में मदद करती हैं. उदाहरण के लिए, गर्मियों में छाछ और दही पेट को ठंडक देने का काम करते हैं. वहीं बाजरा लंबे समय तक पेट भरा रखने और शरीर को ऊर्जा देने में मदद करता है. यानी वहां का पूरा भोजन मौसम और शरीर की जरूरत के हिसाब से बना हुआ माना जाता है.
हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि ज्यादा मिर्च हर किसी के लिए फायदेमंद होती है. जिन लोगों को एसिडिटी, पेट में जलन, अल्सर या पाचन संबंधी समस्या हो, उनके लिए बहुत ज्यादा तीखा खाना परेशानी बढ़ा सकता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हर इंसान का शरीर अलग तरीके से रिएक्ट करता है, इसलिए अपनी सहन क्षमता के अनुसार ही तीखा खाना खाना चाहिए.

