जयपुर में चुनाव आयोग कार्यालय की ओर बढ़े कांग्रेस नेता, पुलिस ने चलाया वाटर कैनन; गहलोत-डोटासरा समेत कई हिरासत में जयपुर: मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर राजस्थान कांग्रेस ने सोमवार, 28 सितंबर को जयपुर में बड़ा प्रदर्शन किया। शहीद स्मारक पर सभा के बाद कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने निकले। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। वाटर कैनन के इस्तेमाल के बाद इन नेताओं सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया और विद्याधर नगर थाने ले जाया गया। थाने में भी कांग्रेस नेताओं ने दिया धरना हिरासत में लिए जाने के बाद कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता विद्याधर नगर थाने में ही धरने पर बैठ गए। नेताओं ने SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। रिपोर्टों के अनुसार हिरासत में लिए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं को बाद में रिहा कर दिया गया। शहीद स्मारक पर हुई सभा मार्च से पहले शहीद स्मारक पर कांग्रेस की सभा आयोजित की गई। यहां पार्टी नेताओं ने SIR और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए और कहा कि कांग्रेस इन मुद्दों को आगे भी जनता के बीच ले जाएगी। ये आरोप कांग्रेस नेताओं की ओर से लगाए गए हैं। पुलिस ने प्रदर्शन को देखते हुए चुनाव आयोग कार्यालय और सचिवालय की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की थी। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के बीच प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया। स्थिति बिगड़ने पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। कांग्रेस का यह प्रदर्शन देश के विभिन्न हिस्सों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों की कड़ी में हुआ। चुनाव प्रक्रिया और SIR को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष अलग है; इसलिए इन आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।