नागौर के देवराम सांचोरिया की अनोखी कहानी: कंप्यूटर नहीं, स्मार्टफोन बना लेखन का हथियार; दो किताबें अमेज़न पर प्रकाशित
18 महीने के स्वाध्याय और मेहनत से तैयार कीं विज्ञान, दर्शन और चेतना पर आधारित दो पुस्तकें; लेखक के अनुसार, भारत सरकार के कॉपीराइट कार्यालय में भी कराया पंजीकरण

नागौर, राजस्थान। बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए हमेशा महंगे संसाधनों की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी हाथ में मौजूद एक छोटा-सा स्मार्टफोन भी ज्ञान रचने का माध्यम बन सकता है। राजस्थान के नागौर जिले की जायल तहसील के सोमरा (सोमड़ा) गांव के निवासी देवराम सांचोरिया की कहानी इसी सोच को सामने लाती है। देवराम का दावा है कि उन्होंने बिना कंप्यूटर या लैपटॉप के, केवल स्मार्टफोन की मदद से करीब 18 महीनों तक मेहनत कर दो पुस्तकें तैयार कीं, जो अब Amazon Kindle पर उपलब्ध हैं।
ग्रामीण परिवेश में रहकर स्वतंत्र अध्ययन और लेखन करने वाले देवराम ने विज्ञान, व्यावहारिक दर्शन, मानव मस्तिष्क और चेतना जैसे विषयों को अपनी पुस्तकों का आधार बनाया है। उनके मुताबिक, लेखन के दौरान उन्होंने स्मार्टफोन के वर्चुअल कीपैड और वॉयस-कमांड जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल किया। उनकी यह पहल दिखाती है कि डिजिटल तकनीक का रचनात्मक उपयोग करके सीमित संसाधनों में भी अपने विचारों को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है।
दो किताबें, दो अलग विषय और सोचने के नए सवाल
देवराम सांचोरिया की पहली पुस्तक ‘100 रुपये का दिमाग और करोड़ का अस्तित्व’ (The 100 Rupee Brain, The Crore Rupee Existence) मानव मस्तिष्क, आत्म-मूल्य और मानसिक क्षमता पर केंद्रित है। पुस्तक का मूल विचार यह है कि इंसान को अपनी क्षमताओं को कम नहीं आंकना चाहिए। लेखक इसके माध्यम से हीन भावना से बाहर निकलने, अपनी सोच को पहचानने और जीवन में अपनी संभावनाओं का उपयोग करने का संदेश देना चाहते हैं।
उनकी दूसरी पुस्तक ‘शून्यता से अनंत तक’ (Shunyata Se Anant Tak) शून्य की अवधारणा, उसके ऐतिहासिक और गणितीय महत्व तथा विज्ञान और ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़े विचारों पर आधारित है। लेखक ने इस पुस्तक के जरिए शून्य से अनंत तक की वैचारिक यात्रा को पाठकों के सामने रखने का प्रयास किया है।
दोनों पुस्तकों के विषय अलग हैं, लेकिन इनके केंद्र में अध्ययन, विचार और मनुष्य की समझ को विस्तार देने की कोशिश दिखाई देती है।
कॉपीराइट पंजीकरण को लेकर लेखक ने दी जानकारी

देवराम सांचोरिया के अनुसार, उनकी दोनों पुस्तकों के लिए भारत सरकार के कॉपीराइट कार्यालय में पंजीकरण संबंधी आवेदन दर्ज कराए गए हैं। उन्होंने पहली पुस्तक के लिए डायरी संख्या LD-48765/2026-CO और दूसरी पुस्तक के लिए LD-48321/2026-CO का उल्लेख किया है।
कॉपीराइट डायरी संख्या आम तौर पर आवेदन के रिकॉर्ड से संबंधित होती है। इसे अंतिम पंजीकरण प्रमाणपत्र या स्वीकृति के समान नहीं माना जाना चाहिए। इसलिए पुस्तकों के कॉपीराइट की अंतिम स्थिति की पुष्टि संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड या प्रमाणपत्र से की जानी चाहिए।
सीमित संसाधनों में लेखन, युवाओं के लिए संदेश
देवराम के अनुसार, लेखन की इस यात्रा में नियमित अध्ययन, अपने विचारों को व्यवस्थित करना और मोबाइल पर लंबे समय तक काम करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा। उन्होंने स्मार्टफोन को केवल मनोरंजन का साधन मानने के बजाय लेखन और ज्ञान अर्जित करने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया।
उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है जो संसाधनों की कमी के कारण अपने विचारों, रचनात्मकता या अध्ययन को आगे नहीं बढ़ा पाते। हालांकि, किसी पुस्तक का महत्व उसके विषय, शोध, तर्क और पाठकों को मिलने वाली उपयोगिता से तय होता है; इसलिए इन पुस्तकों की वास्तविक बौद्धिक उपलब्धि का आकलन पाठकों और विषय विशेषज्ञों की समीक्षा से भी होगा।
अमेज़न किंडल पर मुफ्त उपलब्धता का दावा
लेखक की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, दोनों ई-बुक्स के लिए सीमित अवधि का मुफ्त डाउनलोड ऑफर रखा गया है। पहली पुस्तक के लिए 21 अक्टूबर तक और दूसरी पुस्तक के लिए 22 से 26 अक्टूबर तक मुफ्त उपलब्धता की जानकारी दी गई है।
हालांकि, मुफ्त ऑफर की तारीखें और उपलब्धता Amazon Kindle पर समय, क्षेत्र और प्रचार संबंधी शर्तों के अनुसार बदल सकती हैं। पाठकों को डाउनलोड करने से पहले संबंधित पुस्तक के अमेज़न पेज पर कीमत और ऑफर की पुष्टि करनी चाहिए।
सोमरा गांव से डिजिटल मंच तक पहुंचने की देवराम सांचोरिया की यह पहल एक महत्वपूर्ण संदेश देती है—तकनीक का इस्तेमाल केवल सामग्री देखने के लिए ही नहीं, बल्कि सीखने, लिखने और अपने विचार दुनिया तक पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है।

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