आदर्श क्रेडिट घोटाला: निवेशकों की रकम वापसी की दिशा में बड़ा कदम, हाईकोर्ट ने बनाई उच्चस्तरीय समिति जोधपुर: लाखों निवेशकों से जुड़े चर्चित आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने निवेशकों की रकम की वापसी और लिक्विडेशन प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी के लिए पूर्व भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्देश दिया है। यह फैसला उन लाखों निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो वर्षों से अपनी जमा पूंजी की वापसी का इंतजार कर रहे हैं। निवेशकों के हितों की सुरक्षा पर जोर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मामले में निवेशकों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। समिति का उद्देश्य उपलब्ध संपत्तियों का मूल्यांकन, लिक्विडेशन प्रक्रिया की निगरानी और कानूनी प्रक्रिया के तहत निवेशकों को राशि लौटाने की दिशा में तेजी लाना होगा। अदालत ने समिति को आवश्यकता पड़ने पर चार्टर्ड अकाउंटेंट, वित्तीय विशेषज्ञों और कानूनी विशेषज्ञों की सहायता लेने की भी अनुमति दी है। मामले की अगली सुनवाई हाईकोर्ट ने समिति को जल्द अपनी कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित की गई है, जिसमें समिति की प्रगति रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा। क्या है आदर्श क्रेडिट मामला? आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी का मामला राजस्थान के चर्चित वित्तीय मामलों में से एक है। जांच एजेंसियों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोगों ने बेहतर रिटर्न के वादे पर इस संस्था में निवेश किया था। बाद में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद मामला जांच एजेंसियों तक पहुंचा। इस प्रकरण की जांच विभिन्न एजेंसियां कर रही हैं। मामले में धन के कथित दुरुपयोग, निवेशकों की राशि के प्रबंधन और अन्य वित्तीय पहलुओं की जांच जारी है। अदालत की अहम टिप्पणी सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले को गंभीर आर्थिक अपराध की श्रेणी में माना और कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। अदालत का मानना है कि लिक्विडेशन प्रक्रिया में तेजी आने से निवेशकों को राहत मिलने की संभावना बढ़ेगी।