बाड़मेर के युवा बुनकर बरीगा राम को राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित बाड़मेर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर के युवा बुनकर बरीगा राम ने अपनी पारंपरिक कला और नवाचार के दम पर प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उन्हें वर्ष 2025 का राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बरीगा राम को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। बरीगा राम बाड़मेर जिले के सेड़वा क्षेत्र की आलिसरो की बस्ती के रहने वाले हैं। साधारण परिवार से आने वाले बरीगा राम ने परिवार की पारंपरिक हथकरघा कला को आगे बढ़ाते हुए पट्टू बुनाई में नया प्रयोग किया। उनकी मेहनत और रचनात्मकता ने स्थानीय कला को देशभर में पहचान दिलाने का काम किया है। पारंपरिक पट्टू को साड़ी का नया रूप दिया बरीगा राम की सबसे खास उपलब्धि यह है कि उन्होंने पारंपरिक पट्टू कपड़े को पहली बार साड़ी के रूप में तैयार करने का प्रयोग किया। उन्होंने सदियों पुरानी बुनाई तकनीक को बरकरार रखते हुए इसमें आधुनिक डिजाइन और आकर्षक रंगों का इस्तेमाल किया। उनकी तैयार की गई पट्टू साड़ी में राजस्थान की पारंपरिक बुनाई की झलक के साथ आधुनिक फैशन का मेल देखने को मिलता है। इसी नवाचार और उत्कृष्ट शिल्पकला के कारण उनकी डिजाइन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय ने उनकी पट्टू साड़ी को पारंपरिक तकनीक, उत्कृष्ट बुनाई और नवाचार के आधार पर राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार के लिए चुना। बचपन से हथकरघे से जुड़ा रहा परिवार बरीगा राम का बचपन हथकरघा और सिलाई के माहौल में बीता। उन्होंने परिवार के सदस्यों को पारंपरिक बुनाई और सिलाई का काम करते हुए देखा और इसी कला को आगे बढ़ाने का फैसला किया। शुरुआत में उन्होंने कुर्ते और दुपट्टे तैयार किए। इसके बाद उनका ध्यान पारंपरिक पट्टू बुनाई की ओर गया। उन्होंने इस कला में प्रयोग करते हुए पट्टू को साड़ी के रूप में तैयार करने पर काम शुरू किया। लगातार मेहनत और प्रयोग के बाद उन्होंने ऐसी पट्टू साड़ी तैयार की, जिसमें पारंपरिक बुनाई के साथ आधुनिक डिजाइन और रंगों का संयोजन किया गया। यही प्रयोग उनकी राष्ट्रीय पहचान का आधार बना। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलने पर परिवार में खुशी नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बरीगा राम को सम्मानित किया। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए शिल्पकारों और बुनकरों के बीच बाड़मेर के युवा बुनकर को यह सम्मान मिलना जिले के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सम्मान मिलने के बाद बरीगा राम के परिवार और उनके क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमावर्ती और ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान हासिल करना आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। CM भजनलाल शर्मा ने दी बधाई बरीगा राम की उपलब्धि पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी उन्हें बधाई दी। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा बाड़मेर के युवा बुनकर को राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार से सम्मानित किया जाना पूरे राजस्थान के लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री ने बरीगा राम की कला, कौशल और मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि राजस्थान की पीढ़ियों पुरानी हथकरघा विरासत को आगे बढ़ाने वाली है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि बरीगा राम की सफलता युवा पीढ़ी को पारंपरिक कला और शिल्प के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए प्रेरित करेगी। बाड़मेर की पट्टू बुनाई को मिली नई पहचान बाड़मेर और पश्चिमी राजस्थान में पट्टू बुनाई की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। स्थानीय परिस्थितियों और पारंपरिक जीवनशैली से जुड़ी इस कला को बरीगा राम ने नए प्रयोग के जरिए आधुनिक बाजार से जोड़ने की कोशिश की है। पट्टू को साड़ी के रूप में विकसित करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे पारंपरिक बुनकरों को अपने उत्पादों में नए डिजाइन और बाजार की मांग के अनुसार बदलाव करने की प्रेरणा मिल सकती है। बरीगा राम का राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि बाड़मेर की पारंपरिक पट्टू कला और राजस्थान की हथकरघा विरासत के लिए भी बड़ी उपलब्धि है। Highlights बाड़मेर के युवा बुनकर बरीगा राम को राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली में किया सम्मानित। पारंपरिक पट्टू कपड़े को पहली बार साड़ी के रूप में नया रूप दिया। आधुनिक डिजाइन और आकर्षक रंगों से पट्टू बुनाई में किया नवाचार। CM भजनलाल शर्मा ने उपलब्धि पर दी बधाई। बरीगा राम की सफलता से बाड़मेर की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय पहचान मिली।