भजनलाल ने गहलोत पर लगाए नकली खाद-बीज से किसानों को लूटने के आरोप, गहलोत बोले- 24 घंटे में सबूत दें या माफी मांगें जोधपुर/जयपुर। राजस्थान की राजनीति में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को जोधपुर में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान की सभा में गहलोत पर तीखा हमला बोलते हुए उनके पुराने खाद-बीज कारोबार को लेकर किसानों को लूटने का आरोप लगाया। इसके जवाब में गहलोत ने बुधवार को सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि आरोपों के समर्थन में तथ्य और दस्तावेज सार्वजनिक करें, अन्यथा माफी मांगें। गहलोत ने मुख्यमंत्री के बयान को कपोल-कल्पित कहानी बताते हुए कहा कि व्यक्तिगत रूप से लगाए गए आरोपों से उन्हें पीड़ा पहुंची है। उन्होंने मुख्यमंत्री से यह भी सवाल किया कि अनंता रिसॉर्ट को विशेष आर्थिक पैकेज देने के मामले में उनकी क्या भूमिका रही और इस प्रकरण की जांच सीबीआई को क्यों नहीं सौंपी जा रही। जोधपुर की सभा में गहलोत पर बरसे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मंगलवार को भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत जोधपुर पहुंचे थे। उन्होंने गांधी मैदान से गोल बिल्डिंग चौराहे तक पदयात्रा की और इसके बाद सभा को संबोधित किया। सभा में उन्होंने कांग्रेस पर देशभर में अराजकता फैलाने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस जहां चुनाव जीतती है, वहां ईवीएम को सही बताती है, लेकिन हारने पर उसी व्यवस्था पर सवाल उठाती है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना और एसआईआर के मुद्दे पर चुनाव आयोग को निशाना बनाने को लेकर भी कांग्रेस की आलोचना की। भजनलाल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस परिवारवाद की राजनीति से बाहर नहीं निकल पा रही है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी का जनता से संपर्क टूट चुका है और वह सत्ता के लिए बेचैन है। घुसपैठ, आतंकवाद और देश की अर्थव्यवस्था को लेकर भी उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर निशाना साधा। 'मैं किसान का बेटा हूं, आप जादूगर के बेटे हैं' सभा में मुख्यमंत्री ने अशोक गहलोत पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए उनके पुराने खाद-बीज कारोबार का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ''मैं किसान का बेटा हूं, आप तो जादूगर के बेटे हैं।'' मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि गहलोत की खाद-बीज की दुकान के समय किसानों को नकली खाद और बीज के जरिए नुकसान पहुंचाया जाता था। उन्होंने गहलोत के भाई के गोदाम पर छापे का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि उनके लिए किसान कमाई का जरिया थे। भजनलाल ने कहा कि गहलोत आज किसानों को लेकर बात करते हैं, जबकि उनके पुराने कारोबार को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे ब्रजवासी हैं और किसी भी आरोप का जवाब देने से पीछे नहीं हटेंगे। मुख्यमंत्री ने गहलोत के पूर्व कार्यकाल और कांग्रेस की आंतरिक राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की एक रैली में प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भाषण देने का मौका मिला, लेकिन तीन बार मुख्यमंत्री रहे गहलोत को मंच से बोलने का अवसर नहीं दिया गया। इसे लेकर उन्होंने गहलोत की पार्टी में स्थिति पर सवाल उठाए। पूर्व ओएसडी और पीएसओ को लेकर भी उठाए सवाल मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में गहलोत के पूर्व ओएसडी और पीएसओ से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने शशिकांत और राजकुमार यादव का नाम लेते हुए सवाल उठाए तथा पेपर लीक गिरोह और कथित संबंधों को लेकर आरोप लगाए। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में रिश्तेदारों को जमीन की लीज देने और कुछ अन्य लोगों के नामों का उल्लेख करते हुए भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार करने वाला व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। भजनलाल ने कांग्रेस के शासनकाल में अनुच्छेद 356 के इस्तेमाल और आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतंत्र की बात करने वाली कांग्रेस का इतिहास भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने को लेकर भी विपक्ष की आलोचना की। गहलोत का पलटवार- आरोपों के दस्तावेज दें, नहीं तो माफी मांगें मुख्यमंत्री के बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि जोधपुर में मुख्यमंत्री ने बिना तथ्यों के अनर्गल बातें कही हैं। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत तौर पर उनके बारे में झूठे आरोप लगाकर एक कपोल-कल्पित कहानी प्रचारित की है। गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री अपने आरोपों का विस्तृत विवरण और संबंधित दस्तावेज उन्हें भी दें और प्रदेश की जनता के सामने भी रखें। ऐसा नहीं करने पर उन्होंने 24 घंटे के भीतर माफी मांगने की मांग की। गहलोत ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल से जुड़े विला खरीद और अनंता रिसॉर्ट को विशेष पैकेज दिए जाने के मामले पर स्थिति स्पष्ट करेंगे। अनंता रिसॉर्ट और IAS शिखर अग्रवाल का मामला क्या है? गहलोत ने अपने बयान में अनंता रिसॉर्ट को दिए गए विशेष आर्थिक पैकेज का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जिस बोर्ड की बैठक में कंपनी को विशेष छूट देने का फैसला हुआ, उसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री स्वयं हैं। ऐसे में इस फैसले में उनकी भूमिका क्या थी? यह विवाद वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और अनंता ब्रांड के तहत होटल-रिसॉर्ट संचालित करने वाली कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े आरोपों के बाद चर्चा में आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की प्रारंभिक जांच में आरोप सामने आए हैं कि अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग कर कंपनी को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाया। इसमें रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों में छूट, आवश्यक प्रमाणपत्रों की जांच के बिना मंजूरियां और विशेष रियायती आर्थिक पैकेज जैसे मामले शामिल हैं। ACB की प्रारंभिक जांच में शिखर अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर उदयपुर के बुझड़ा तथा अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट्स में विला खरीदने के मामले की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी इन खरीद और कंपनी को मिले कथित सरकारी लाभों के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है। इंडियन एक्सप्रेस की 2 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने कंपनी को दिए गए विशेष पैकेज को फिलहाल रोक दिया है। ACB की प्रारंभिक जांच में सामने आए आरोपों की विस्तृत जांच की जा रही है। हालांकि, ये आरोप अभी जांच के विषय हैं और इन्हें अदालत में साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता। गहलोत ने पूछा- जांच CBI को क्यों नहीं सौंप रहे? गहलोत ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि अनंता रिसॉर्ट प्रकरण की जांच राज्य की ACB के बजाय केंद्रीय जांच एजेंसी CBI को क्यों नहीं सौंपी जा रही है। उनका तर्क है कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले बोर्ड के फैसले की जांच मुख्यमंत्री के अधीन आने वाली एजेंसी से निष्पक्ष तरीके से कैसे हो पाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले में अपनी भूमिका स्पष्ट करने की मांग की। गहलोत के मुताबिक, मुख्यमंत्री को राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय अनंता रिसॉर्ट को दिए गए विशेष पैकेज और संबंधित फैसलों पर प्रदेश की जनता को जवाब देना चाहिए। इस तरह खाद-बीज कारोबार को लेकर मुख्यमंत्री के आरोप और अनंता रिसॉर्ट प्रकरण पर गहलोत के सवालों ने राजस्थान की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री की ओर से आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने और गहलोत के 24 घंटे के अल्टीमेटम पर उनके अगले कदम पर रहेगी।