CJP के सौरव दास की नागरिकता जांच की मांग, मद्रास हाईकोर्ट का नोटिस

CJP के सौरव दास की नागरिकता और पहचान की जांच की मांग पर मद्रास हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया। याचिका में पासपोर्ट, आधार और सोशल मीडिया अकाउंट पर कार्रवाई की मांग है।

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CJP के सौरव दास की नागरिकता की जांच की मांग, मद्रास हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय को भेजा नोटिस

नई दिल्ली/चेन्नई: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक और पत्रकार सौरव दास की नागरिकता और पहचान को लेकर मद्रास हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्रीय गृह मंत्रालय, सौरव दास और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

याचिका में सौरव दास की राष्ट्रीयता और पारिवारिक पृष्ठभूमि की विस्तृत जांच कराने की मांग की गई है। इसके अलावा, यदि जांच में उनके विदेशी नागरिक होने की पुष्टि होती है तो पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द करने की मांग भी रखी गई है।

किसने दायर की याचिका?

यह जनहित याचिका तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले के निवासी गणेश कुमार ने दायर की है। याचिका में सौरव दास की पहचान पर सवाल उठाते हुए उनका नाम ‘योगेश शर्मा उर्फ सौरव दास’ बताया गया है।

याचिकाकर्ता ने अदालत से उनके पहचान संबंधी दस्तावेजों, पारिवारिक पृष्ठभूमि और नागरिकता की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश देने का अनुरोध किया है। याचिका में उनकी मां और जैविक पिता से संबंधित जानकारी की जांच की मांग भी शामिल है।

पासपोर्ट और आधार रद्द करने की भी मांग

याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय और संबंधित सरकारी एजेंसियों से सौरव दास की नागरिकता की जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि जांच में उनके भारतीय नागरिक नहीं होने की पुष्टि होती है तो उनके पासपोर्ट और आधार कार्ड को रद्द करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।

हालांकि, ये सभी याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप और मांगी गई राहतें हैं। अभी तक अदालत ने सौरव दास की नागरिकता को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है।

सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक करने की भी मांग

याचिका में सौरव दास के एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम अकाउंट ब्लॉक करने का निर्देश देने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों सहित न्यायपालिका के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं।

इसके साथ ही याचिका में उन्हें भविष्य में न्यायपालिका और न्यायाधीशों के खिलाफ ऐसी टिप्पणियां करने से रोकने का अनुरोध भी किया गया है। इस संबंध में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के संबंधित अधिकारियों को भी पक्षकार बनाया गया है।

छह सप्ताह में जवाब देने के निर्देश

मद्रास हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने 30 अक्टूबर को मामले की सुनवाई की। अदालत ने केंद्रीय गृह मंत्रालय, सौरव दास और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं।

याचिका पर अगली सुनवाई के लिए छह सप्ताह बाद की तारीख तय की गई है। अदालत ने फिलहाल केवल संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। नागरिकता, पहचान और सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़े आरोपों पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया गया है।

इस मामले में अब केंद्र सरकार और अन्य पक्षों के जवाब के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

 


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