तिहाड़ जेल भेजे गए सौरव दास और आशुतोष रांका, तिरंगा विवाद पर विपक्ष ने उठाए सवाल; राहुल गांधी से संजय सिंह तक ने दी प्रतिक्रिया
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर तिरंगा लेकर पहुंचने और प्रदर्शन से जुड़े मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को दोनों को तिहाड़ जेल भेजे जाने की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया। पार्टी नेता अजिंक्य शिंदे को 5,000 रुपये के मुचलके पर रिहा किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, आम आदमी पार्टी के नेताओं और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। CJP नेताओं का कहना है कि वे राष्ट्रीय ध्वज लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे और देशभक्ति के नारे लगाए थे। वहीं, पुलिस की कार्रवाई अनधिकृत प्रवेश, निषेधाज्ञा के उल्लंघन, सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा और पहले से दिए गए शांति संबंधी बांड की शर्तों के कथित उल्लंघन से जुड़ी बताई गई है। ऐसे में विवाद का केंद्र केवल तिरंगा फहराना नहीं, बल्कि प्रदर्शन स्थल पर प्रवेश और पुलिस की कार्रवाई का कानूनी आधार भी है।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, CJP के सदस्य 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रदर्शन के लिए पहुंचे थे। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे भारतीय तिरंगा लेकर वहां गए और 'भारत माता की जय' जैसे नारे लगाए। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित प्रतिबंधों के बावजूद क्षेत्र में प्रवेश किया और पुलिसकर्मियों के काम में बाधा पहुंचाई।
यह भी पढ़ें
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित किए जाने की स्थिति में बदलाव के बाद वहां प्रदर्शन को लेकर प्रतिबंध लागू थे। पुलिस ने इसी संदर्भ में कार्रवाई की। मामले में कथित अनधिकृत प्रवेश, निषेधाज्ञा के उल्लंघन और शांति बांड की शर्तें तोड़ने जैसे आरोप सामने आए हैं।
दोनों नेताओं को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। इसके बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। CJP के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे को 5,000 रुपये के मुचलके पर रिहा किए जाने की खबर है।
राहुल गांधी ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की आलोचना की। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अधिकार का मुद्दा उठाते हुए कार्रवाई पर सवाल किए।
राहुल गांधी के रुख के अनुसार, युवाओं को अपनी बात रखने और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने जंतर-मंतर को आम नागरिकों के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल बताते हुए कहा कि इसे लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
इस मामले ने प्रदर्शन की स्वतंत्रता, राष्ट्रीय ध्वज के इस्तेमाल और सार्वजनिक स्थलों पर लागू प्रतिबंधों को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह ने भी उठाए सवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तिरंगा फहराने को लेकर कार्रवाई पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या अपने ही देश में राष्ट्रीय ध्वज लहराना अपराध है।
AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने CJP नेताओं की हिरासत पर सवाल उठाते हुए ब्रिटिश शासन के दौर से तुलना की और युवाओं के साथ टकराव से बचने की बात कही।
संजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय पर तिरंगा फहराने के इतिहास का भी उल्लेख किया। उनकी प्रतिक्रिया राजनीतिक आरोपों और विचारों के रूप में सामने आई है; मामले की कानूनी स्थिति का निर्धारण संबंधित आदेशों और तथ्यों के आधार पर होगा।
आतिशी और सौरभ भारद्वाज ने सरकार को घेरा
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने तिरंगा फहराने के मामले में युवाओं को जेल भेजे जाने पर आपत्ति जताई और मौजूदा स्थिति की तुलना आपातकाल से की।
AAP की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने 1975 के आपातकाल और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के बीच समानताएं बताते हुए युवाओं के आंदोलनों, चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों और सरकार की नीतियों का जिक्र किया।
ये प्रतिक्रियाएं विपक्षी नेताओं की राजनीतिक राय हैं। हिरासत के आदेश और पुलिस की कार्रवाई के औपचारिक आधार को समझने के लिए संबंधित कानूनी दस्तावेजों को देखना जरूरी है।
NCP (SP) प्रवक्ता ने नीतीश कुमार से मांगा जवाब
NCP (SP) के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने CJP नेताओं की न्यायिक हिरासत पर सवाल उठाते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने जंतर-मंतर मामले की तुलना दिल्ली में हुई एक अन्य घटना से करते हुए पुलिस कार्रवाई और जमानत के मामलों में समानता को लेकर सवाल उठाए।
गावंडे ने नीतीश कुमार के छात्र और जेपी आंदोलन से जुड़े अतीत का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग भी की।
हालांकि, अलग-अलग मामलों में आरोप, कानूनी प्रावधान और न्यायिक परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। इसलिए दोनों घटनाओं की तुलना करने के लिए उनके संबंधित रिकॉर्ड और आदेशों का अध्ययन जरूरी है।
AISA और नेहा बोरा ने की रिहाई की मांग
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत पर सवाल उठाते हुए उनके समर्थन में आवाज उठाई। संगठन ने दोनों नेताओं की रिहाई की मांग की।
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने राष्ट्रीय ध्वज फहराने के मामले में कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन ने इस घटना को नागरिक अधिकारों और विरोध दर्ज कराने की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा।
योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने उठाए सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने भी दोनों नेताओं के समर्थन में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि तिरंगा फहराने के मामले में जेल भेजे जाने की नौबत क्यों आई और लोगों से उनके समर्थन में खड़े होने की अपील की।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने जंतर-मंतर पर प्रवेश और राष्ट्रीय ध्वज फहराने से जुड़े कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि किसी स्थान को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया गया है, तो वहां प्रवेश करने और तिरंगा फहराने से जुड़े आरोपों का कानूनी आधार क्या है।
इन सवालों का उत्तर संबंधित प्रतिबंधात्मक आदेशों, दर्ज मामलों और मजिस्ट्रेट के आदेश की शर्तों से स्पष्ट होगा।
CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर लगाए आरोप
CJP की लीगल हेड रतना सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अदालत के सामने प्रदर्शन को लेकर गलत जानकारी रखी। उनका दावा है कि लोगों को जंतर-मंतर पर एकत्र होने के लिए सार्वजनिक आह्वान किए जाने की बात सही नहीं है।
CJP पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई और शांति बांड से जुड़े आरोपों पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, पुलिस के दावे और पार्टी की आपत्तियों के बीच वास्तविक स्थिति समझने के लिए अदालत में रखे गए दस्तावेजों और संबंधित आदेशों की जांच जरूरी है।
अभिजीत दिपके ने संविधान और लोकतंत्र का मुद्दा उठाया
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नागरिकों को संविधान से मिले अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठानी चाहिए।
दिपके ने राष्ट्रीय ध्वज फहराने को लेकर सवाल उठाया और दोनों नेताओं की हिरासत की आलोचना की। CJP का कहना है कि यह कार्रवाई विरोध की आवाज दबाने जैसी है। दूसरी ओर, पुलिस की ओर से बताए गए आरोप प्रदर्शन स्थल पर प्रतिबंधों और कथित नियम उल्लंघन से जुड़े हैं।
अजिंक्य शिंदे बोले—तिरंगा लेकर पहुंचे थे जंतर-मंतर
CJP नेता अजिंक्य शिंदे ने कहा कि वह सौरव दास, आशुतोष रांका और पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ राष्ट्रीय ध्वज लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे। उनके अनुसार, वहां देशभक्ति के नारे लगाए गए थे।
शिंदे ने दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की आलोचना की और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बताया। दूसरी ओर, पुलिस की कार्रवाई के संबंध में अनधिकृत प्रवेश और पहले से लागू शांति संबंधी शर्तों के उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं।
तिरंगा, प्रदर्शन की स्वतंत्रता और कानून—अब आगे क्या?
सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद यह मामला राष्ट्रीय ध्वज, लोकतांत्रिक विरोध और सार्वजनिक स्थलों पर लागू प्रतिबंधों को लेकर व्यापक बहस का विषय बन गया है।
विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस की ओर से कथित अनधिकृत प्रवेश, निषेधाज्ञा और शांति बांड के उल्लंघन जैसे आधार बताए गए हैं। अजिंक्य शिंदे को 5,000 रुपये के मुचलके पर रिहा किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई, हिरासत के आदेश और संबंधित पक्षों की दलीलें महत्वपूर्ण होंगी। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार न्यायिक हिरासत का आधार केवल तिरंगा फहराना नहीं बताया गया है; पुलिस ने अन्य कथित उल्लंघनों का भी उल्लेख किया है। अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित आदेशों और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।

Diya












