बिम्सटेक में ड्रग्स तस्करी पर सख्ती, डार्क वेब पर भारत का फोकस

बिम्सटेक की पहली गृह मंत्री बैठक में ड्रग्स तस्करी, डार्क वेब लेनदेन, गोल्डन ट्राएंगल और आतंकवादी फंडिंग रोकने के लिए क्षेत्रीय सहयोग पर जोर दिया गया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नई दिल्ली में बिम्सटेक गृह मंत्रियों की बैठक में अपनी बात रखी. (IANS)

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बिम्सटेक में ड्रग्स तस्करी पर सख्ती की तैयारी, डार्क वेब और गोल्डन ट्राएंगल पर भारत का फोकस

नई दिल्ली। नशीले पदार्थों की सीमा पार तस्करी, डार्क वेब के जरिए होने वाले संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और आतंकवाद को मिलने वाली आर्थिक मदद पर लगाम लगाने के लिए भारत ने क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की अपील की है। 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित बिम्सटेक के गृह मंत्रियों की पहली बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ड्रग्स तस्करी से निपटने के लिए किसी एक देश की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सभी सदस्य देशों को साझा रणनीति के साथ काम करना होगा।

बैठक में मादक पदार्थों की तस्करी के साथ उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की अवैध आपूर्ति, संगठित अपराध और आतंकवादी नेटवर्क की फंडिंग जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया। अमित शाह ने नशीले पदार्थों के कारोबार को ‘डेथ ट्रैफिकिंग’ बताते हुए कहा कि इसका नुकसान युवाओं, समाज और आने वाली पीढ़ियों को उठाना पड़ता है।

डार्क वेब के लेनदेन और केमिकल सप्लाई चेन पर नजर

ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क अब पारंपरिक रास्तों के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म और छिपे हुए ऑनलाइन बाजारों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। डार्क वेब के माध्यम से होने वाले लेनदेन की जांच और अवैध कमाई के स्रोतों का पता लगाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती है।

बैठक में इस चुनौती से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने, वित्तीय जांच को मजबूत बनाने और संदिग्ध लेनदेन से जुड़े नेटवर्क की पहचान करने पर जोर दिया गया। ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर केमिकल्स की निगरानी भी अहम विषय रही, क्योंकि इनका वैध औद्योगिक इस्तेमाल होने के बावजूद अवैध नशीले पदार्थों के निर्माण में दुरुपयोग हो सकता है।

भारत का जोर ऐसे मामलों में सीमा शुल्क अधिकारियों, पुलिस, खुफिया एजेंसियों और वित्तीय जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर है।

गोल्डन ट्राएंगल क्यों है चिंता का विषय?

गोल्डन ट्राएंगल दक्षिण-पूर्व एशिया का वह क्षेत्र है, जिसमें म्यांमार, लाओस और थाईलैंड के सीमावर्ती इलाके शामिल हैं। यह क्षेत्र लंबे समय से अफीम और अन्य अवैध नशीले पदार्थों के उत्पादन तथा तस्करी से जुड़ा रहा है। हाल के वर्षों में सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी भी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनी है।

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की भौगोलिक निकटता के कारण इस क्षेत्र में होने वाली गतिविधियां भारत के मादक पदार्थ नियंत्रण और सीमा सुरक्षा प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण हैं। सीमावर्ती इलाकों में संघर्ष, दुर्गम भूभाग और निगरानी की कठिनाइयां तस्करी रोकने की कार्रवाई को जटिल बना सकती हैं।

अमित शाह ने किसी खास सैन्य या सुरक्षा अभियान की घोषणा नहीं की, लेकिन उनके बयान में क्षेत्रीय समन्वय और संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

बिम्सटेक देशों ने पांच अहम क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति जताई

बैठक में बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सदस्य देशों ने सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी:

  • ड्रग्स नियंत्रण: नशीले पदार्थों, साइकोट्रोपिक पदार्थों और प्रीकर्सर केमिकल्स की अवैध तस्करी रोकना।
  • आतंकवाद और कानूनी सहयोग: आतंकवादी गतिविधियों तथा सीमा पार अपराधों से निपटने के लिए समन्वय बढ़ाना।
  • भगोड़े अपराधियों की वापसी: प्रत्यर्पण और आपसी कानूनी सहायता की प्रक्रिया मजबूत करना।
  • साइबर सुरक्षा: साइबर अपराधों की जांच और डिजिटल खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ाना।
  • संस्थागत क्षमता निर्माण: विशेषज्ञ प्रशिक्षण, सूचना साझा करने और जांच एजेंसियों के बीच सहयोग को बेहतर बनाना।

पांच समझौतों और कार्ययोजनाओं को मंजूरी

भारत सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बैठक में मानव तस्करी के खिलाफ बिम्सटेक कन्वेंशन, ड्रग कंट्रोल प्लान ऑफ एक्शन, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग से मुकाबले के लिए क्षमता निर्माण संबंधी समझौता, अवैध वित्तीय प्रवाह रोकने की कार्ययोजना और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए क्षेत्रीय समन्वय योजना को मंजूरी दी गई।

इसके अलावा, सदस्य देशों ने दिल्ली घोषणा-पत्र अपनाया। इसमें सीमा पार आतंकवाद, कट्टरपंथ, मानव तस्करी, ड्रग्स तस्करी, साइबर अपराध और संगठित अपराध के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई गई। घोषणा में सूचना साझा करने, आपसी कानूनी सहायता, प्रत्यर्पण और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच समन्वय को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

बैठक का व्यापक संदेश यह रहा कि ड्रग्स तस्करी और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क से निपटने के लिए केवल राष्ट्रीय स्तर की कार्रवाई नहीं, बल्कि बिम्सटेक देशों के बीच निरंतर सहयोग और साझा रणनीति की आवश्यकता है।

स्रोत: भारत सरकार का गृह मंत्रालय और प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो।

 


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