SIR विवाद: फॉर्म 6 भरने पर किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलेगा, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि फॉर्म 6 भरकर दोबारा पंजीकरण कराने वाले मतदाताओं के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। साथ ही, शीर्ष अदालत ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को नोटिस जारी कर इस मामले पर जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।
फॉर्म 6 को लेकर क्या है विवाद?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद पी. दातार ने दलील दी कि SIR प्रक्रिया के दौरान जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 भरने को कहा जा रहा है।
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फॉर्म 6 का इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए किया जाता है। याचिकाकर्ता के वकील का कहना था कि पहले से मतदाता के रूप में पंजीकृत रहे व्यक्ति से यह फॉर्म भरवाना कानूनी जटिलता पैदा कर सकता है, क्योंकि इसमें दी जाने वाली घोषणा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
वकील ने अदालत से आग्रह किया कि सूची से हटाए गए पुराने मतदाताओं के लिए अलग फॉर्म या स्पष्ट प्रक्रिया तय की जाए, ताकि उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के दौरान किसी कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
दलीलें सुनने के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मौखिक टिप्पणी की कि किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। अदालत ने इस मामले में निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर उसका पक्ष मांगा।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि केवल यह आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है और हटाए गए मतदाताओं के लिए स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। उनका तर्क था कि पहले से पंजीकृत मतदाताओं को नए मतदाता की तरह आवेदन करने के लिए कहना उचित प्रक्रिया के सवाल खड़े करता है।
अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग का पक्ष सुने बिना दावों और आपत्तियों की समय-सीमा बढ़ाने के संबंध में आदेश देना उचित नहीं होगा। हालांकि, पीठ ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय देने पर विचार किया जा सकता है।
महाराष्ट्र में मतदाता सूची से नाम हटाने पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि महाराष्ट्र में लगभग 9 करोड़ मतदाताओं में से करीब 33 प्रतिशत के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लगभग 1.22 करोड़ नामों को ‘लॉजिकल विसंगतियों’ के आधार पर हटाया गया।
वकील ने मुंबई और पुणे के कुछ इलाकों का उल्लेख करते हुए कहा कि पुनर्विकास परियोजनाओं के कारण स्थान बदलने वाले कई मतदाताओं के नाम भी सूची में नहीं मिले। ये आंकड़े सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से रखे गए दावे हैं।
5 नवंबर को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, अगली सुनवाई 5 नवंबर को निर्धारित की गई है। अदालत इस दौरान SIR प्रक्रिया और हटाए गए मतदाताओं के दोबारा पंजीकरण से जुड़े सवालों पर आयोग का पक्ष सुनेगी।
इस मामले का मुख्य सवाल यह है कि जिन नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हट गए हैं, उनके पुनः पंजीकरण की प्रक्रिया किस तरह स्पष्ट और कानूनी रूप से सुरक्षित बनाई जाए, ताकि पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहें।
ध्यान दें: फॉर्म 6 भरने पर मुकदमा नहीं चलाने संबंधी बात सुनवाई के दौरान अदालत की मौखिक टिप्पणी थी। इसे पूरे SIR विवाद पर अंतिम फैसला या सभी कानूनी मुद्दों के निपटारे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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