CJP तिरंगा मार्च: दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, सेंट्रल पार्क पर SC का रुख

CJP के तिरंगा मार्च से पहले दिल्ली में सुरक्षा कड़ी। सेंट्रल पार्क बंद करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया। पत्रकारों की हिरासत पर भी सवाल।

CJP के तिरंगा मार्च से पहले कनॉट प्लेस में सुरक्षा व्यवस्था

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CJP तिरंगा मार्च से पहले दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, सेंट्रल पार्क बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

नई दिल्ली। कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर के लिए बंद रखा है। इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि सभी पक्षों को समझदारी से काम लेना चाहिए और छोटे व्यापारियों की आजीविका पर पड़ने वाले असर को भी ध्यान में रखना होगा।

सेंट्रल पार्क बंद रखने के फैसले पर क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने पार्क बंद करने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन के अधिकार, कानून-व्यवस्था और कनॉट प्लेस के छोटे व्यापारियों की रोजी-रोटी से जुड़े पहलुओं का उल्लेख किया।

NDMC ने प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के मद्देनजर पार्क बंद रखने का फैसला किया था। व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को आशंका है कि प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित हो सकता है। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने भी मार्च पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की थी। हालांकि, पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दर्ज कराया गया था।

मार्च के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था सख्त

CJP ने कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च आयोजित करने का आह्वान किया है। इसके मद्देनजर दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों ने इलाके में निगरानी बढ़ाई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी में 25 हजार से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती की योजना बनाई गई है। संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग, सीसीटीवी निगरानी और यातायात प्रबंधन के इंतजाम किए गए हैं।

प्रदर्शन के कारण कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निषेधाज्ञा लागू होने की जानकारी भी दी है। प्रशासन की ओर से लोगों को यात्रा से पहले यातायात संबंधी निर्देशों की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।

सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में मार्च

CJP का यह प्रदर्शन संगठन के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में आयोजित किया जा रहा है। दोनों को जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने की घटना के बाद गिरफ्तार किया गया था। संगठन का कहना है कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े सवालों को लेकर भी विरोध दर्ज करा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर चिंता जताई है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार ने चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात या जानबूझकर गलत तरीके से नाम हटाए जाने के आरोपों से असहमति जताई है। इसलिए मतदाता सूची से जुड़े दावों और आपत्तियों का आकलन आधिकारिक रिकॉर्ड तथा संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर किया जाना जरूरी है।

पत्रकारों की हिरासत पर प्रेस स्वतंत्रता संगठन की चिंता

इस पूरे विरोध-प्रदर्शन से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में पत्रकारों की हिरासत और कथित दुर्व्यवहार को लेकर सवाल उठे हैं। कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 10 और 11 अक्टूबर को दिल्ली, अहमदाबाद, पुणे और मुंबई में प्रदर्शन कवर कर रहे कम से कम 43 पत्रकारों को हिरासत में लिया गया। संगठन ने कुछ पत्रकारों के साथ मारपीट, काम में बाधा डालने और फोन से संबंधित घटनाओं के आरोप भी दर्ज किए हैं।

CPJ के मुताबिक, 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया था कि पत्रकारों और वकीलों को उनके पेशेवर काम में बाधा नहीं पहुंचाई जाएगी। संगठन का आरोप है कि इसके बावजूद कुछ पत्रकारों को हिरासत में लिया गया या उनके काम में रुकावट डाली गई।

ये आंकड़े और आरोप CPJ की रिपोर्ट पर आधारित हैं। पत्रकारों की हिरासत को लेकर पुलिस का पक्ष और प्रत्येक घटना के तथ्य अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण हैं।

प्रदर्शन, कारोबार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन की चुनौती

CJP मार्च को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है, जबकि सेंट्रल पार्क बंद रखने के फैसले पर न्यायिक बहस भी जारी है। एक तरफ प्रदर्शनकारी अपनी मांगें उठाने के अधिकार पर जोर दे रहे हैं, वहीं प्रशासन और स्थानीय व्यापारियों की चिंताएं कानून-व्यवस्था तथा कारोबार पर संभावित असर को लेकर हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए सभी पक्षों से संयम और समझदारी बरतने की उम्मीद जताई है। अब इस घटनाक्रम में प्रदर्शन के संचालन, यातायात व्यवस्था और पत्रकारों के काम की स्वतंत्रता पर प्रशासन के कदमों पर नजर रहेगी।

 


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