Marwar Mahotsav 2026: 617 मीटर लंबे और 30 किलो वजनी साफे ने खींचा ध्यान, BSF के ऊंटों के करतब बने आकर्षण
जोधपुर: सूर्यनगरी में ‘मारवाड़ महोत्सव 2026’ का आगाज राजस्थानी संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा और रोमांचक प्रदर्शनों के साथ हुआ। दो दिवसीय महोत्सव में 617 मीटर लंबे और करीब 25 से 30 किलो वजनी साफे ने लोगों का ध्यान खींचा। वहीं, सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सजे-धजे ऊंटों के प्रदर्शन, हेरिटेज वॉक और पारंपरिक प्रतियोगिताओं ने आयोजन को खास बना दिया।
पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य मारवाड़ की लोकसंस्कृति, पारंपरिक कलाओं और विरासत को व्यापक पहचान दिलाना है। आयोजन में बीएसएफ, पुलिस प्रशासन, शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों ने भी भागीदारी की।
मेहरानगढ़ से हेरिटेज वॉक, घंटाघर से निकली शोभायात्रा

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महोत्सव की शुरुआत मेहरानगढ़ से सूर्य आराधना और हेरिटेज वॉक के साथ हुई। इसके बाद ऐतिहासिक घंटाघर से उम्मेद स्टेडियम तक शोभायात्रा निकाली गई। इसमें बीएसएफ के सजे हुए ऊंट, स्कूली छात्र-छात्राएं और केसरिया साफा पहने प्रतिभागी शामिल हुए।
शोभायात्रा के दौरान राजस्थानी परंपराओं और मारवाड़ की सांस्कृतिक पहचान की झलक देखने को मिली। विभिन्न मार्गों से गुजरती यह यात्रा उम्मेद स्टेडियम पहुंचकर संपन्न हुई, जहां आगे के सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
BSF के ऊंटों ने दिखाए करतब, हथियारों की प्रदर्शनी भी लगी

उम्मेद स्टेडियम में बीएसएफ ने हथियारों की प्रदर्शनी लगाई। इसके साथ ही बल के ऊंट दस्ते ने विशेष फॉर्मेशन, नृत्य और योग से जुड़े करतब प्रस्तुत किए। सजे-धजे ऊंटों की सामूहिक प्रस्तुति दर्शकों के लिए प्रमुख आकर्षण रही।
बीएसएफ का ऊंट दस्ता राष्ट्रीय समारोहों और परेड में अपनी विशिष्ट उपस्थिति के लिए जाना जाता है। पारंपरिक सजावट और अनुशासित फॉर्मेशन के कारण यह दस्ता राजस्थान की मरुस्थलीय विरासत तथा सीमा सुरक्षा बल की परंपराओं को भी प्रदर्शित करता है।
वहीं, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के कला विभाग ने मांडना कला और अन्य चित्रकलाओं के माध्यम से राजस्थान की लोककलाओं को प्रदर्शित किया।
617 मीटर का साफा बना महोत्सव की चर्चा
मारवाड़ महोत्सव के दौरान बीकानेर के साफा कलाकार रमेश व्यास ने 617 मीटर लंबा और लगभग 25 से 30 किलोग्राम वजनी साफा पहनकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। आयोजकीय विवरण के अनुसार, उन्होंने इसे राजस्थान की सबसे बड़ी और वजनी पगड़ी बताया।
राजस्थान में साफा केवल पारंपरिक पोशाक का हिस्सा नहीं, बल्कि सम्मान, गौरव और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है। महोत्सव में इतने लंबे साफे का प्रदर्शन इसी परंपरा को अनोखे अंदाज में सामने लाया।
हालांकि, इसे राजस्थान का सबसे बड़ा या सबसे वजनी साफा बताने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि के लिए रिकॉर्ड या आधिकारिक प्रमाण आवश्यक होगा।
मटका दौड़ से मूंछ प्रतियोगिता तक, पारंपरिक खेलों की धूम

उम्मेद स्टेडियम में विभिन्न पारंपरिक प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। इनमें मिस्टर मारवाड़, मिस मारवाड़, मारवाड़ श्री, मटका दौड़, रस्साकशी और मूंछ व साफा प्रतियोगिताएं शामिल रहीं। ऊंटों का कैमेल टैटू शो भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बना।
इसके अलावा हस्तशिल्प मेले और पतंगबाजी ने महोत्सव में रंग भर दिए। अलग-अलग शहरों से पहुंचे पर्यटकों ने राजस्थानी संस्कृति, पारंपरिक परिधानों और ऊंटों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
महाराष्ट्र के ठाणे से आई पर्यटक कविता देशपांडे ने आयोजन में सजे-धजे ऊंटों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने का अनुभव साझा करते हुए इसे रोमांचक बताया।
अशोक उद्यान में सांस्कृतिक संध्या

महोत्सव के पहले दिन शाम को अशोक उद्यान में सेलिब्रिटी सांस्कृतिक संध्या आयोजित किए जाने का कार्यक्रम था। इसमें लोक कलाकारों के साथ इंडियन आइडल फेम पीयूष पवार की प्रस्तुति प्रस्तावित थी।
मारवाड़ महोत्सव जैसे आयोजन लोकसंगीत, पारंपरिक नृत्य, हस्तशिल्प और स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों से पर्यटकों को राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता से रूबरू होने का अवसर मिलता है और स्थानीय विरासत को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
मारवाड़ की विरासत को मिला सांस्कृतिक मंच
मारवाड़ महोत्सव 2026 में विशाल साफे, बीएसएफ के ऊंट दस्ते, पारंपरिक प्रतियोगिताओं और लोककलाओं ने जोधपुर की सांस्कृतिक पहचान को सामने रखा। ऐतिहासिक स्थलों से लेकर खुले मैदानों तक फैली गतिविधियों ने महोत्सव को स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाया।

Deepak













