Pali Cyber Fraud: APK फाइल डाउनलोड करते ही मोबाइल हैक, दो लोगों के खाते से ₹4.05 लाख की ठगी
राजस्थान के पाली जिले में साइबर ठगी के दो मामलों में कथित तौर पर APK फाइल के जरिए मोबाइल तक पहुंच बनाकर बैंक खातों से कुल 4 लाख 5 हजार रुपये निकाल लिए गए। एक मामला पाली शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र का है, जबकि दूसरा सादड़ी थाना क्षेत्र में सामने आया है। दोनों मामलों में शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस में दर्ज शिकायतों के अनुसार, ठगों ने पीड़ितों को लिंक या APK फाइल भेजकर उसे डाउनलोड और इंस्टॉल करने के लिए राजी किया। इसके बाद उनके बैंक खातों से रकम निकाल ली गई। ये घटनाएं मोबाइल पर आने वाले अनजान लिंक और ऐप इंस्टॉल करने से जुड़े साइबर जोखिमों को उजागर करती हैं।
पाली में APK फाइल से साइबर ठगी का पहला मामला
कोतवाली थाना क्षेत्र के नवलखा मंदिर निवासी मोहम्मद अकरम (29) ने शिकायत में बताया कि 19 अक्टूबर को उनके मोबाइल पर एक लिंक आया था। लिंक खोलने के बाद मोबाइल में एक ऐप इंस्टॉल हो गया। शिकायत के मुताबिक, इसके बाद साइबर ठगों ने उनके बैंक खाते से चार ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 2 लाख 98 हजार रुपये निकाल लिए।
यह भी पढ़ें
बताया गया है कि खाते से 99-99 हजार रुपये के दो और 50-50 हजार रुपये के दो ट्रांजेक्शन किए गए। मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है।
सादड़ी में APK इंस्टॉल करने के बाद खाते से निकले ₹1.07 लाख
दूसरा मामला सादड़ी थाना क्षेत्र के भादरास गांव का है। मांगीलाल चौधरी (37) ने रिपोर्ट में बताया कि 21 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे एक व्यक्ति ने उन्हें झांसे में लेकर APK फाइल भेजी। फाइल पर भरोसा करके उसे मोबाइल में इंस्टॉल करने के बाद उनके बैंक खाते से 1 लाख 7 हजार रुपये निकाल लिए गए।
दोनों मामलों में कुल 4.05 लाख रुपये की कथित साइबर ठगी की शिकायत दर्ज हुई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फाइल किस माध्यम से भेजी गई, मोबाइल में कौन-सा ऐप इंस्टॉल हुआ और रकम किन खातों में ट्रांसफर की गई।
क्या होती है APK फाइल और कैसे हो सकती है ठगी?
APK Android मोबाइल ऐप इंस्टॉल करने वाली फाइल का फॉर्मेट है। हर APK फाइल नुकसानदायक नहीं होती, लेकिन अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई फाइल इंस्टॉल करना जोखिम भरा हो सकता है। धोखाधड़ी करने वाले ऐप संवेदनशील जानकारी हासिल करने, स्क्रीन पर गतिविधि देखने या गलत अनुमतियों के जरिए नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं।
ऐसे ऐप को SMS पढ़ने, नोटिफिकेशन देखने, Accessibility Services या स्क्रीन साझा करने जैसी अनुमति देना जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऐप इंस्टॉल न करें और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
APK साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें?
- अनजान APK फाइल इंस्टॉल न करें: WhatsApp, SMS या ईमेल पर आई संदिग्ध फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल करने से बचें।
- संदिग्ध लिंक से सावधान रहें: बैंक, सरकारी विभाग या किसी परिचित के नाम से आए लिंक को भी जांचे बिना न खोलें।
- अनावश्यक अनुमतियां न दें: किसी ऐप को SMS, नोटिफिकेशन, स्क्रीन कंट्रोल या Accessibility की अनुमति देने से पहले उसकी जरूरत और विश्वसनीयता जांचें।
- बैंक अलर्ट पर नजर रखें: खाते से अनजान ट्रांजेक्शन होने पर तुरंत बैंक से संपर्क करके खाते और डिजिटल भुगतान की सुरक्षा के जरूरी कदम उठाएं।
- 1930 पर तुरंत कॉल करें: साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर जल्द शिकायत करें और cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें। ट्रांजेक्शन आईडी, बैंक मैसेज और अन्य सबूत सुरक्षित रखें।
ठगी होने पर तुरंत कार्रवाई क्यों जरूरी है?
साइबर ठगी के बाद शुरुआती समय में शिकायत करने से संबंधित बैंक खातों में रकम रोकने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती। इसलिए देर किए बिना बैंक और साइबर हेल्पलाइन को सूचना देना जरूरी है।
पाली के दोनों मामलों में पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ठगी में किस तकनीक का इस्तेमाल हुआ और आरोपियों तक पहुंचने के लिए कौन-से डिजिटल सबूत मिले हैं।

Diya












