बूटाटी धाम में ₹22.74 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला, अध्यक्ष समेत 11 पदाधिकारियों पर FIR नागौर: राजस्थान के प्रसिद्ध बूटाटी धाम स्थित श्री चतुरदास महाराज मंदिर समिति से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड को लेकर विवाद सामने आया है। न्यायालय के आदेश के बाद कुचेरा थाने में मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राठौड़ समेत 11 पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में वर्ष 2023-24 और 2024-25 के रिकॉर्ड के आधार पर करीब 22 करोड़ 74 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता और गबन के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल आरोपों की जांच की जा रही है और दस्तावेजों तथा संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुआ मामला शिकायतकर्ता की ओर से न्यायालय में परिवाद पेश किया गया था। न्यायालय के आदेश के बाद कुचेरा पुलिस ने मंदिर समिति से जुड़े पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। नागौर के एएसपी आसाराम चौधरी के अनुसार, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। संबंधित लोगों के बयान लिए जा रहे हैं। इसके अलावा मंदिर समिति के वित्तीय रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य जरूरी जानकारी की भी जांच की जाएगी। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता है। दो वित्तीय वर्षों के रिकॉर्ड पर उठे सवाल परिवाद में वर्ष 2023-24 और 2024-25 के वित्तीय रिकॉर्ड को आधार बनाकर बड़ी रकम में अनियमितता का आरोप लगाया गया है। परिवादी के अधिवक्ता डॉ. पवन श्रीमाली के मुताबिक, वर्ष 2023-24 के रिकॉर्ड में करीब ₹15.16 करोड़ की प्रमाणित वित्तीय अनियमितता का उल्लेख किया गया है। वहीं एक अन्य वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जाने को लेकर करीब ₹7.58 करोड़ की अतिरिक्त संभावित अनियमितता का दावा किया गया है। इन दोनों रकम को मिलाकर शिकायत में करीब ₹22.74 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया गया है। सोने-चांदी के हिसाब को लेकर भी सवाल परिवाद में मंदिर में उपलब्ध सोना-चांदी और दूसरी मूल्यवान संपत्तियों के रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, पुराने रिकॉर्ड में करीब 36 किलो चांदी का उल्लेख नहीं मिलने की बात कही गई है। वहीं बाद के रिकॉर्ड में करीब 35.5 किलो चांदी की खरीद दर्शाए जाने का दावा किया गया है। परिवाद में सोना-चांदी और अन्य संपत्तियों की अनुमानित कीमत करीब ₹2.60 करोड़ बताई गई है। इन संपत्तियों के रिकॉर्ड और वास्तविक उपलब्धता की जांच अब पुलिस द्वारा की जाएगी। CCTV, सुरक्षा और गौशाला खर्च पर भी आपत्ति शिकायत में मंदिर समिति द्वारा अलग-अलग मदों में किए गए खर्च पर भी सवाल उठाए गए हैं। इनमें ग्राम विकास के नाम पर करीब ₹31.27 लाख, CCTV व्यवस्था पर ₹82.41 लाख, सुरक्षा सेवाओं पर ₹31.33 लाख और गौशाला के रखरखाव पर करीब ₹17.87 लाख खर्च किए जाने का उल्लेख है। इसके अलावा मरम्मत सहित अन्य कार्यों पर करीब ₹97.48 लाख खर्च किए जाने को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है। ATM और सुलभ कॉम्प्लेक्स की आय का भी जिक्र परिवाद में मंदिर परिसर से जुड़े अन्य आय स्रोतों के लेखांकन पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, ATM से प्राप्त करीब ₹1.40 लाख और सुलभ कॉम्प्लेक्स से प्राप्त करीब ₹18.12 लाख की राशि के पूर्ण लेखे-जोखे को लेकर आपत्ति जताई गई है। पुलिस जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर फिलहाल यह मामला आरोपों और पुलिस जांच के स्तर पर है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस वित्तीय दस्तावेज, समिति के रिकॉर्ड और संबंधित पदाधिकारियों के बयान खंगालेगी। जांच के आधार पर ही कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।