तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल तेहरान की अमेरिका के साथ किसी भी नई वार्ता की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी विदेश नीति और बातचीत की शर्तें किसी दूसरे देश के दबाव में तय नहीं करेगा। सरकारी मीडिया से बातचीत में गरीबाबादी ने कहा कि ओमान की मध्यस्थता में कुछ कूटनीतिक संपर्क जारी हैं, लेकिन अमेरिका यह तय नहीं कर सकता कि कब संघर्ष करना है और कब बातचीत की मेज पर लौटना है। अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप गरीबाबादी ने दावा किया कि हालिया तनाव के दौरान संघर्ष रोकने की पहल अमेरिका की ओर से की गई थी। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी परिस्थिति में दबाव की राजनीति स्वीकार नहीं करेगा और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि ईरान ने सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए बातचीत की इच्छा जताई थी। होर्मुज स्ट्रेट पर सख्त रुख ईरान ने एक बार फिर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अपना कड़ा रुख दोहराया है। गरीबाबादी ने कहा कि इस समुद्री मार्ग पर किसी भी विदेशी सैन्य हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा और ईरान अपनी समुद्री सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी सुरक्षा से जुड़े फैसले ईरान स्वयं करेगा। विदेशी नौसैनिक गतिविधियों पर चेतावनी ईरानी उप विदेश मंत्री ने कहा कि यदि क्षेत्र में किसी विदेशी सैन्य गतिविधि से देश की संप्रभुता को खतरा पहुंचता है तो ईरान उचित जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय जलमार्गों में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को गंभीरता से लिया जाएगा। क्षेत्र में बढ़ी सैन्य गतिविधियां इस बीच मध्य पूर्व में समुद्री सुरक्षा को लेकर अमेरिका ने भी अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, क्षेत्र में कई नौसैनिक जहाज तैनात हैं जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के मिशन में लगे हुए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर दुनिया की नजर बनी हुई है।