Indian Hockey Jersey Controversy: केसरिया जर्सी पर विवाद, पूर्व कप्तानों और नवीन पटनायक ने उठाए सवाल

भारतीय हॉकी टीम की नई केसरिया जर्सी को लेकर विवाद गहराया। पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा, परगट सिंह और नवीन पटनायक ने फैसले पर सवाल उठाए, जबकि हॉकी इंडिया ने तकनीकी कारण बताए।

हॉकी इंडिया ने नई जर्सी में भारतीय पुरुष और महिला टीमों की तस्वीरें जारी की हैं

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आगामी एफआईएच हॉकी विश्व कप से पहले भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई है। हॉकी इंडिया ने पुरुष और महिला टीमों के लिए पारंपरिक नीली जर्सी की जगह केसरिया रंग की नई जर्सी लॉन्च की है। इस फैसले पर पूर्व हॉकी कप्तानों, राजनीतिक नेताओं और खेल प्रेमियों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने रही हैं।

नीली जर्सी की जगह आई केसरिया किट

हॉकी इंडिया द्वारा जारी नई जर्सी में प्रमुख रंग केसरिया रखा गया है। संस्था का कहना है कि यह रंग साहस, बलिदान और विजय का प्रतीक है। जर्सी के डिजाइन में अशोक चक्र, तिरंगे की झलक और भारतीय सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित ग्राफिक्स शामिल किए गए हैं।

पूर्व कप्तानों ने जताई नाराजगी

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा ने इस बदलाव को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी की पहचान वर्षों से नीली जर्सी रही है और खिलाड़ियों प्रशंसकों की भावनाएं इससे जुड़ी हुई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह केवल रंग का बदलाव नहीं, बल्कि टीम की विरासत से जुड़ा मुद्दा है।

वहीं पूर्व कप्तान परगट सिंह ने आरोप लगाया कि खेलों को राजनीतिक रंग देने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और खेल संस्थाओं को खिलाड़ियों की सुविधाओं और खेल के विकास पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

हॉकी इंडिया ने दी तकनीकी वजह

विवाद बढ़ने के बाद हॉकी इंडिया ने स्पष्ट किया कि जर्सी बदलने का फैसला तकनीकी कारणों से लिया गया है। संस्था के अनुसार अंतरराष्ट्रीय हॉकी में अब अधिकांश मुकाबले नीले सिंथेटिक टर्फ पर खेले जाते हैं, जिससे नीली जर्सी पहनने वाले खिलाड़ियों की दृश्यता प्रभावित होती है। इसी वजह से अधिक स्पष्टता और पहचान के लिए केसरिया रंग को चुना गया।

हॉकी इंडिया ने यह भी कहा कि खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ से चर्चा के बाद ही नई जर्सी को अंतिम रूप दिया गया है।

नवीन पटनायक ने किया विरोध

ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी की नीली जर्सी केवल एक रंग नहीं बल्कि देश की खेल विरासत और गौरव का प्रतीक रही है। उनके अनुसार राष्ट्रीय टीम की पहचान से जुड़े ऐसे बदलावों को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।

प्रियंका गांधी ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी जर्सी के रंग में बदलाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों और इतिहास को बदलने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इसे अनावश्यक विवाद बताया।

पहले भी बदल चुकी है जर्सी

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा कि भारतीय टीम पहले भी विभिन्न टूर्नामेंटों में पीली और हल्के नीले रंग की जर्सी पहन चुकी है। उनके अनुसार जर्सी के रंग में बदलाव खेलों में सामान्य प्रक्रिया है और इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।

नई जर्सी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस लगातार जारी है। जहां एक वर्ग इसे आधुनिक और आकर्षक डिजाइन बता रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसे भारतीय हॉकी की पारंपरिक पहचान से जुड़ा विषय मानकर विरोध कर रहा है।

 


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