मुंबई: वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच मंगलवार, 29 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 138.04 अंक यानी 0.19% गिरकर 72,633.68 के स्तर पर खुला। वहीं निफ्टी 50 में 47.80 अंक यानी 0.21% की गिरावट रही और यह 22,732.45 पर खुला।
बाजार पर बढ़ती बॉन्ड यील्ड, महंगा कच्चा तेल और कमजोर अंतरराष्ट्रीय संकेतों का असर दिखाई दिया। इससे पहले सोमवार को भी घरेलू बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई थी और सेंसेक्स करीब 1,124 अंक नीचे बंद हुआ था।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
बाजार में दबाव की एक प्रमुख वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी रही। एक्सचेंज के अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने सोमवार को ₹5,353.22 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की।
इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा देते हुए ₹5,189.02 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की।
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निफ्टी के लिए 22,700 के आसपास अहम स्तर
बाजार विश्लेषकों की नजर अब निफ्टी के 22,700 के आसपास के स्तर पर बनी हुई है। सोमवार को निफ्टी 22,800 के नीचे बंद हुआ था और बाजार में ऊपरी स्तरों पर भी सावधानी बनी हुई है।
हालांकि, ऐसे तकनीकी स्तरों को बाजार की निश्चित दिशा या भविष्य की गारंटी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। वैश्विक संकेत, तेल की कीमतें, विदेशी निवेश और भू-राजनीतिक घटनाक्रम आगे बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।
फार्मा में खरीदारी, ऑटो और FMCG पर दबाव
शुरुआती कारोबार में अलग-अलग सेक्टरों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में खरीदारी दिखाई दी, जबकि ऑटो, मीडिया, FMCG और सीमेंट से जुड़े शेयरों पर दबाव रहा।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए अहम कारक है। तेल महंगा होने पर आयात लागत और महंगाई से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं।
क्रूड ऑयल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से बढ़ी चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल आपूर्ति को लेकर चिंताओं ने कीमतों को प्रभावित किया है।
इसके साथ अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ाया। एशियाई बाजारों में भी मंगलवार के शुरुआती कारोबार में कमजोरी देखने को मिली।
आगे इन संकेतकों पर रहेगी बाजार की नजर
आने वाले कारोबार में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच किसी भी निवेश निर्णय को व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता के आधार पर लेना चाहिए।

Deepak







