BRICS Summit 2026: दिल्ली में जुटेंगे दुनिया के बड़े नेता, मोदी-शी-पुतिन की मुलाकात पर दुनिया की नजर
BRICS Summit 2026: भारत में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। 12 और 13 सितंबर 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में BRICS Summit 2026 का आयोजन होगा। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन की मेजबानी करेंगे।
इस बार सम्मेलन की सबसे बड़ी खासियत दुनिया के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दिल्ली पहुंच रहे हैं। शी जिनपिंग की भारत यात्रा सात साल बाद हो रही है, जबकि पुतिन की यात्रा एक साल से भी कम समय में दूसरी भारत यात्रा होगी।
भारत की अध्यक्षता में BRICS का बड़ा सम्मेलन
भारत ने 1 जनवरी 2026 से BRICS की अध्यक्षता संभाली है। आधिकारिक तौर पर इस वर्ष की थीम रखी गई है—
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“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”
यानी सम्मेलन में लचीलापन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास पर विशेष जोर रहेगा। भारत की अध्यक्षता के दौरान देशभर के 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
भारत पहले भी 2012, 2016 और 2021 में BRICS की अध्यक्षता कर चुका है। 2026 की अध्यक्षता भारत की चौथी BRICS Chairship है।
मोदी-शी-पुतिन की मुलाकात पर खास नजर
BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस और चीन के राष्ट्राध्यक्षों के साथ होने वाली बैठकों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की खास नजर रहेगी।
प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात को लेकर पहले ही आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। 31 अगस्त को बिश्केक में SCO Summit के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी और मोदी ने पुतिन को दिल्ली में BRICS Summit के लिए आमंत्रित किया था।
वहीं, शी जिनपिंग का भारत दौरा भी बेहद अहम माना जा रहा है। चीन ने अब उनकी BRICS Summit के लिए भारत यात्रा की पुष्टि कर दी है। यह करीब सात वर्षों में शी का पहला भारत दौरा होगा।
किन देशों के नेता होंगे शामिल?
BRICS Summit में सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के अलावा पार्टनर देशों और आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
प्रमुख नेताओं में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन शामिल हैं।
सम्मेलन में आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक राजनीति, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और बहुपक्षीय संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
BRICS Summit में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
इस बार भारत ने BRICS की कार्यवाही को चार प्रमुख क्षेत्रों के आसपास केंद्रित किया है। इनमें वैश्विक परिस्थितियों से निपटने के लिए resilience, तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति के लिए innovation, सदस्य देशों के बीच बेहतर तालमेल के लिए cooperation और लंबे समय तक टिकाऊ विकास के लिए sustainability शामिल हैं।
इसके अलावा सम्मेलन में खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, महत्वपूर्ण सप्लाई चेन, व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दे भी एजेंडे में हैं।
BRICS का लगातार बढ़ता दायरा
BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ हुई थी। दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद समूह का नाम BRICS हुआ। इसके बाद समूह का विस्तार हुआ और मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, UAE और इंडोनेशिया जैसे देश इसमें शामिल हुए।
विस्तार के बाद BRICS का आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। यही वजह है कि दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन सिर्फ सदस्य देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजरों में महत्वपूर्ण है।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को भी काफी मजबूत किया गया है। विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां और दिल्ली पुलिस VIP मूवमेंट के लिए विशेष रूट और सुरक्षा व्यवस्था तैयार कर रही हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, सम्मेलन के दौरान राजधानी के कई हिस्सों में ट्रैफिक डायवर्जन और अस्थायी रोक लगाई जा सकती है। खासतौर पर राष्ट्राध्यक्षों के काफिले के गुजरने के दौरान कुछ मार्गों पर यातायात प्रभावित होने की संभावना है।
12 सितंबर से शुरू होगा मुख्य कार्यक्रम
BRICS Leaders' Summit का मुख्य कार्यक्रम 12 सितंबर से भारत मंडपम में शुरू होगा। पहले दिन सदस्य देशों के नेता विभिन्न सत्रों में हिस्सा लेंगे।
कार्यक्रम में वैश्विक शासन व्यवस्था और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर बंद कमरे में चर्चा के अलावा भारत के नवाचार और तकनीकी क्षमताओं को प्रदर्शित करने वाले कार्यक्रम भी शामिल हैं।
नेताओं की सामूहिक तस्वीर और अन्य सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय गतिविधियों के बाद पहले दिन का कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आयोजित डिनर के साथ आगे बढ़ेगा।
13 सितंबर को क्या होगा?
दूसरे दिन भी BRICS नेताओं के बीच महत्वपूर्ण बैठकें और विचार-विमर्श जारी रहेगा। सम्मेलन में वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा होगी।
दो दिवसीय बैठक के अंत में New Delhi Declaration के जरिए सम्मेलन के प्रमुख निष्कर्ष और सदस्य देशों की प्रतिबद्धताओं को सामने लाया जाएगा।
क्यों अहम है BRICS Summit 2026?
BRICS का विस्तार होने के बाद समूह में दुनिया की अलग-अलग आर्थिक और रणनीतिक शक्तियां शामिल हो चुकी हैं। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और भू-राजनीति को लेकर तेजी से बदलाव हो रहे हैं, भारत की मेजबानी में होने वाला यह सम्मेलन नई दिल्ली के लिए कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
खासकर मोदी-शी और मोदी-पुतिन मुलाकातों के कारण BRICS Summit 2026 पर भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

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