राष्ट्रपति मुर्मू ने एंटी पेपर लीक कानून 2026 को दी मंजूरी, अब 2 महीने में होगी जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा ट्रायल
नई दिल्ली: देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल के बढ़ते मामलों पर सख्ती करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन कानून, 2026 को मंजूरी दे दी है। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलते ही यह कानून लागू हो गया है।
सरकार का कहना है कि नए कानून का उद्देश्य भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, दोषियों को जल्द सजा दिलाना और परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करना है।
दो महीने में पूरी होगी जांच
नए कानून के तहत पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों के मामलों की जांच अधिकतम दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इसके बाद मामले को विशेष अदालत में भेजा जाएगा ताकि लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण न्याय में देरी न हो।
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हर राज्य में बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट
संशोधित कानून के अनुसार राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कर सकेंगे।
इन अदालतों में मामलों की रोजाना सुनवाई होगी और चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
दोषियों पर कड़ी सजा
नए प्रावधानों के अनुसार—
- पेपर लीक या परीक्षा में धोखाधड़ी करने पर कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल।
- दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
- यदि मामला संगठित गिरोह या संगठित अपराध से जुड़ा पाया जाता है तो कम से कम 7 वर्ष की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
विशेष जांच दल का भी प्रावधान
केंद्र सरकार को आवश्यकता पड़ने पर किसी भी बड़े पेपर लीक मामले की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का अधिकार भी दिया गया है। इसका उद्देश्य राज्यों के बीच फैले संगठित नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करना है।
विशेष लोक अभियोजक होंगे नियुक्त
राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश इन मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए एक या अधिक विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) नियुक्त कर सकेंगे, ताकि मामलों का शीघ्र और प्रभावी निपटारा हो सके।
हाईकोर्ट में अपील की व्यवस्था
कानून के तहत किसी भी फैसले के खिलाफ संबंधित हाईकोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीठ में अपील की जा सकेगी। अपील स्वीकार होने के बाद उसका निपटारा भी तीन महीने के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।
परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की कोशिश
हाल के वर्षों में NEET, भर्ती परीक्षाओं और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक मामलों के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठे थे। सरकार का दावा है कि यह नया कानून ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने, अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल करने और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

News Desk











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