जोधपुर। बासनी औद्योगिक क्षेत्र की एक फैक्ट्री में आग बुझाने के दौरान हुए केमिकल विस्फोट में झुलसे दमकलकर्मियों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। हादसे में गंभीर रूप से घायल तीन फायर फाइटरों की मौत हो चुकी है। इनमें प्रीतेश परमार के बाद सुरेंद्र और प्रदीप ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
23 सितंबर को बासनी क्षेत्र की फैक्ट्री में आग लगने के बाद दमकल की टीमें मौके पर पहुंची थीं। आग पर काबू पाने के दौरान फैक्ट्री के भीतर रखे केमिकल ड्रमों में अचानक विस्फोट हुआ, जिसकी चपेट में कई फायर फाइटर आ गए। शुरुआती रिपोर्टों में 14 दमकलकर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी।
इलाज के दौरान सुरेंद्र और प्रदीप की मौत
हादसे में गंभीर रूप से झुलसे 22 वर्षीय सुरेंद्र का महात्मा गांधी अस्पताल में उपचार चल रहा था। वह नागौर के खींवसर क्षेत्र के रहने वाले थे। रिपोर्टों के मुताबिक उनका शरीर करीब 60-65 प्रतिशत तक झुलस गया था और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।
दूसरे फायर फाइटर प्रदीप ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। प्रदीप ठेके पर दमकलकर्मी के रूप में काम कर रहे थे और झुंझुनूं के बिसाऊ क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं।
यह भी पढ़ें
इससे पहले गंभीर रूप से झुलसे प्रीतेश परमार की मौत हो चुकी थी। वह करीब 90 प्रतिशत तक झुलसे थे और उपचार के दौरान उनकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी। बाद में उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
छह गंभीर दमकलकर्मी जयपुर रेफर
हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल छह दमकलकर्मियों को बेहतर उपचार के लिए जयपुर के SMS अस्पताल भेजा गया था। ट्रैफिक पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एंबुलेंस को जयपुर पहुंचाया था। शुरुआती मेडिकल रिपोर्टों के अनुसार कई घायल 60 से 95 प्रतिशत तक झुलसे थे और कुछ को वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ी।
नगर निगम आयुक्त राहुल जैन के अनुसार जयपुर में भर्ती घायलों की स्थिति पर डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम लगातार नजर रख रही है और उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
एमजीएच मोर्चरी के बाहर धरना
हादसे में जान गंवाने वाले दमकलकर्मियों के परिवारों और कर्मचारियों की ओर से महात्मा गांधी अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरना भी दिया गया। कर्मचारी संगठनों ने हादसे में जान गंवाने और घायल हुए फायर फाइटरों के परिवारों के प्रति समर्थन जताते हुए सहायता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए।
प्रीतेश की मौत के बाद उनके परिजनों ने कुछ समय के लिए शव लेने से इनकार किया था। बाद में परिवार शव लेने के लिए तैयार हुआ और उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
नगर निगम ने घोषित की आर्थिक सहायता
जोधपुर नगर निगम के नवनिर्वाचित महापौर प्रसन्न चंद मेहता ने मृतक दमकलकर्मियों के आश्रित परिवारों को 5 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल फायर फाइटरों को 2 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की है। उन्होंने इसे नगर निगम परिवार की ओर से कर्मचारियों और उनके परिजनों के प्रति जिम्मेदारी बताया।
वहीं एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार राज्य स्तर पर भी मृतक परिवारों के लिए अतिरिक्त सहायता और आश्रित को संविदा नौकरी देने की घोषणा की गई है।
घायलों के इलाज पर प्रशासन की नजर
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी अस्पताल पहुंचकर हादसे के पीड़ितों से मुलाकात की थी। इस दौरान घायलों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन हादसे के कारणों की जांच कर रहे हैं। केमिकल फैक्ट्री में आग लगने और उसके बाद हुए विस्फोट की परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है। इस हादसे ने औद्योगिक क्षेत्रों में अग्निशमन कर्मियों की सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्था से जुड़े सवालों को भी सामने ला दिया है।

Diya














_82034_05092026050519.png)