कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, केस हुआ बंद
नई दिल्ली: देश के चर्चित कोयला ब्लॉक आवंटन (कोलगेट) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को बड़ी कानूनी राहत देते हुए उनके खिलाफ लंबित कार्यवाही को समाप्त कर दिया है। शीर्ष अदालत ने विशेष अदालत द्वारा जारी समन आदेश को निरस्त कर दिया और स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने का पर्याप्त आधार नहीं था।
हालांकि डॉ. मनमोहन सिंह का दिसंबर 2024 में निधन हो चुका है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने केवल तकनीकी आधार पर मामला समाप्त करने के बजाय उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट का विस्तृत परीक्षण किया। अदालत ने कहा कि मामले का निपटारा मेरिट के आधार पर किया जाना न्यायसंगत होगा।
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को माना सही
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि सीबीआई की जांच में पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ अभियोजन चलाने योग्य कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आए थे। ऐसे में विशेष अदालत द्वारा क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार कर समन जारी करना न्यायिक दृष्टि से उचित नहीं था।
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जांच एजेंसी की रिपोर्ट और उपलब्ध रिकॉर्ड का अध्ययन करने पर यह स्पष्ट होता है कि पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का पर्याप्त आधार मौजूद नहीं था।
निधन के बाद भी मेरिट पर सुनाया फैसला
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी माना कि किसी आरोपी के निधन के बाद सामान्य परिस्थितियों में मामला समाप्त किया जा सकता है। इसके बावजूद न्यायालय ने कहा कि इस मामले का व्यापक सार्वजनिक महत्व है, इसलिए तथ्यों और कानून के आधार पर अंतिम निर्णय देना आवश्यक था।
कोर्ट ने कहा कि केवल आरोपी के निधन के कारण मामला बंद करना उचित नहीं होता, यदि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री का परीक्षण कर स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकता हो।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था। उस समय डॉ. मनमोहन सिंह के पास प्रधानमंत्री पद के साथ-साथ कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी था।
विशेष अदालत ने आरोप लगाया था कि आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं और इसी आधार पर डॉ. मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला और तत्कालीन कोयला सचिव पी.सी. पारख को समन जारी किया गया था।
बाद में सीबीआई ने अपनी जांच पूरी कर अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें कहा गया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूर्व प्रधानमंत्री की किसी आपराधिक भूमिका की पुष्टि नहीं होती।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि:
- सीबीआई की जांच में पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।
- विशेष अदालत द्वारा समन जारी करने का निर्णय उचित आधार पर नहीं था।
- क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया जाना चाहिए था।
- मामले को मेरिट के आधार पर समाप्त किया जाता है और पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ सभी लंबित आपराधिक कार्यवाही समाप्त मानी जाएंगी।
राजनीतिक और कानूनी महत्व
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला केवल एक व्यक्ति से जुड़ा निर्णय नहीं, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि किसी भी आपराधिक मामले में केवल आरोपों के आधार पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। जांच एजेंसी की रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों का स्वतंत्र मूल्यांकन न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस फैसले के साथ वर्षों से चर्चित कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही पूरी तरह समाप्त हो गई है और उन्हें इस मामले में अंतिम रूप से राहत मिल गई है।

News Desk











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