जयपुर में करणी सेना प्रदर्शन के बाद घायल देवराज की मौत, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

जयपुर में यूजीसी नियमों के विरोध में करणी सेना के प्रदर्शन के दौरान घायल हुए देवराज की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद संगठन ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच

जयपुर करणी सेना प्रदर्शन में घायल देवराज की मौत

Jaipur

जयपुर में करणी सेना प्रदर्शन के बाद घायल देवराज की मौत, पुलिस कार्रवाई को लेकर बढ़ा विवाद

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में यूजीसी के प्रस्तावित नियमों के विरोध में आयोजित श्री राजपूत करणी सेना की 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा' के बाद एक दुखद घटनाक्रम सामने आया है। प्रदर्शन के दौरान घायल हुए करणी सेना के कार्यकर्ता देवराज की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद करणी सेना और राजपूत समाज के विभिन्न संगठनों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। संगठन ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

प्रदर्शन के बाद बिगड़ी तबीयत

श्री राजपूत करणी सेना ने यूजीसी के नए प्रस्तावित नियमों के विरोध में देशनोक से जयपुर तक 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा' निकाली थी। यात्रा का समापन जयपुर में होना था, जहां प्रदर्शनकारी जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपना चाहते थे।

हालांकि, प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए यात्रा को शहर के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं दी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।

इसी दौरान करणी सेना के कार्यकर्ता देवराज की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल जयपुर के सवाई मान सिंह (SMS) अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

करणी सेना ने लगाए गंभीर आरोप

श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने घटना को लेकर पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया।

मकराना के अनुसार, वॉटर कैनन की तेज बौछार सीधे देवराज को लगी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि पुलिस की कथित लापरवाही और अत्यधिक बल प्रयोग का परिणाम है। संगठन ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस का क्या कहना है?

जयपुर (पश्चिम) के डीसीपी प्रशांत किरण ने मामले पर अलग पक्ष रखा है। उनके अनुसार, उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी के आधार पर देवराज को सीने में दर्द और घबराहट की शिकायत होने पर उनके साथी अस्पताल लेकर पहुंचे थे।

डीसीपी ने बताया कि जानकारी के अनुसार प्रदर्शन शाम लगभग 5:30 बजे समाप्त हो गया था, जबकि देवराज को रात करीब 8 बजे अस्पताल लाया गया। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश

देवराज की मौत की खबर सामने आने के बाद करणी सेना के कार्यकर्ताओं और राजपूत समाज के लोगों में भारी नाराजगी फैल गई। कई स्थानों पर विरोध दर्ज कराया गया और संगठन ने घटना की न्यायिक या उच्च स्तरीय जांच की मांग की।

संगठन का कहना है कि यदि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग नहीं किया जाता, तो यह दुखद घटना टाली जा सकती थी। उन्होंने पुलिस अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग दोहराई है।

क्या था पूरा मामला?

यूजीसी के प्रस्तावित नियमों के विरोध में श्री राजपूत करणी सेना ने राजस्थान के देशनोक से जयपुर तक 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा' का आयोजन किया था। यात्रा का उद्देश्य सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाना और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपना था।

प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए यात्रा को शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। इसके बाद प्रदर्शन स्थल पर तनाव की स्थिति बनी, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।

जांच पर टिकी सभी की नजर

फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासन और पुलिस अपनी-अपनी जांच कर रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर मौत के कारणों की पुष्टि की जाएगी। वहीं, करणी सेना लगातार निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है।

यह मामला अब केवल एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक निर्णय इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।

 


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