Jantar Mantar Case: स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की पुलिस कस्टडी, निशु आजाद के पिता से मारपीट मामले में बड़ा एक्शन
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली पुलिस ने उसे उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार करने के बाद शनिवार को अदालत के सामने पेश किया, जहां से उसे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
मामला उस समय फिर सुर्खियों में आया जब एक वायरल पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज पर कथित तौर पर जंतर-मंतर की घटना में संजय कुमार पर हमला करने की बात कहने का आरोप लगा। इसके बाद गिरफ्तारी की मांग तेज हुई और दिल्ली पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा।
बुलंदशहर से पकड़ा गया स्वतंत्र भारद्वाज
दिल्ली पुलिस की टीम ने 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में कार्रवाई करते हुए स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिया था। पुलिस को उसके बुलंदशहर में होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद टीम सादे कपड़ों में वहां पहुंची और उसे पकड़ लिया।
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इसके बाद उसे दिल्ली लाया गया और शनिवार को कड़कड़डूमा कोर्ट कॉम्प्लेक्स में संबंधित न्यायाधीश के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने मामले की जांच के लिए पुलिस को एक दिन की हिरासत दी।
क्या है जंतर-मंतर विवाद?
यह मामला 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट हुई थी।
शिकायत के मुताबिक संजय कुमार अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ प्रदर्शन में पहुंचे थे और प्रदर्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। इसी दौरान विवाद हुआ और आरोप है कि कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उन्हें इलाज के लिए RML अस्पताल ले जाया गया था, जहां सिर पर चोटें दर्ज हुईं।
इस मामले में शुरुआत में BNS की धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई थी। बाद में विवाद बढ़ने के साथ मामले में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की कार्रवाई भी सामने आई।
वायरल पॉडकास्ट के बाद बढ़ा विवाद
मामले ने सितंबर की शुरुआत में उस वक्त नया मोड़ लिया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक पॉडकास्ट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में उन पर कथित तौर पर संजय कुमार पर हमला करने की बात स्वीकार करने का आरोप लगा।
वीडियो सामने आने के बाद CJP से जुड़े लोगों और अन्य राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग तेज कर दी। दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर भी प्रदर्शन हुआ और पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की गई।
हालांकि, स्वतंत्र भारद्वाज ने बाद में अपने बचाव में कहा कि घटना में उन्होंने जो किया, वह आत्मरक्षा में किया गया था। यानी मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं और पुलिस जांच के बाद ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
72 घंटे में गिरफ्तारी के आश्वासन के बाद कार्रवाई
4 सितंबर को मामले को लेकर प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग थाने के बाहर विरोध जताया था। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाए और मामले में कड़ी धाराएं लगाई जाएं।
पुलिस की ओर से गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद कार्रवाई तेज हुई। कुछ ही घंटों बाद दिल्ली पुलिस की टीम बुलंदशहर पहुंची और स्वतंत्र भारद्वाज को पकड़ लिया।
निशु आजाद के वकील ने उठाए सवाल
स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की पुलिस हिरासत दिए जाने के बाद निशु आजाद की ओर से कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
वकील ऋषभ रंजन ने पुलिस कस्टडी की मांग और आरोपी को जज के समक्ष पेश किए जाने के तरीके पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें सुनवाई की प्रक्रिया और मामले में जोड़ी गई धाराओं के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पुलिस ने अब तक मामले में धाराओं को लेकर स्पष्ट सार्वजनिक जानकारी क्यों नहीं दी है।
पुलिस जांच में अब क्या होगा?
एक दिन की पुलिस कस्टडी के दौरान पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों, वायरल वीडियो और आरोपी के कथित बयानों की जांच कर सकती है। इसके अलावा पुलिस यह भी स्पष्ट करने की कोशिश करेगी कि जंतर-मंतर पर वास्तव में घटनाक्रम किस तरह हुआ था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। आरोपी की ओर से आत्मरक्षा का दावा किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता पक्ष ने हमले का आरोप लगाया है। अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
जंतर-मंतर मामले में आगे की नजर अदालत और जांच पर
वायरल वीडियो से शुरू हुआ यह विवाद अब गिरफ्तारी और पुलिस कस्टडी तक पहुंच चुका है। एक तरफ शिकायतकर्ता पक्ष आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं स्वतंत्र भारद्वाज अपनी कार्रवाई को आत्मरक्षा बता रहे हैं।
अब पुलिस की जांच और आगे की न्यायिक सुनवाई से यह साफ होगा कि मामले में लगाए गए आरोपों का कानूनी आधार क्या है और घटना के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

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