संसद से जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 पारित, दो साल बाद Birth Registration कराने पर कोर्ट का आदेश होगा जरूरी
नई दिल्ली: संसद के दोनों सदनों ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया है। इस संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और विश्वसनीय बनाना है। नए कानून के लागू होने के बाद यदि किसी व्यक्ति का जन्म या मृत्यु पंजीकरण दो वर्ष से अधिक की देरी से कराया जाता है, तो इसके लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) के आदेश की आवश्यकता होगी।
यह संशोधन राष्ट्रपति की मंजूरी और केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावी होगा।
क्या बदला नए कानून में?
अब तक एक वर्ष से अधिक देरी से जन्म या मृत्यु पंजीकरण के मामलों में जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश से प्रक्रिया पूरी की जा सकती थी।
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नए संशोधन के तहत नियमों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है—
- 30 दिन तक: सामान्य प्रक्रिया के अनुसार पंजीकरण।
- 30 दिन से 1 वर्ष तक: जिला रजिस्ट्रार की लिखित अनुमति, निर्धारित शुल्क और आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य।
- 1 वर्ष से 2 वर्ष तक: कार्यकारी मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) की अनुमति आवश्यक।
- 2 वर्ष से अधिक: अब केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) के आदेश के बाद ही जन्म या मृत्यु पंजीकरण संभव होगा।
क्यों किया गया संशोधन?
सरकार का कहना है कि इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य समय पर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण सुनिश्चित करना, फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाना और राष्ट्रीय रिकॉर्ड प्रणाली को अधिक मजबूत बनाना है।
विधेयक के उद्देश्य और कारणों में कहा गया है कि विलंबित पंजीकरण के मामलों में अधिक सख्ती लाने से रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ेगी और समय पर पंजीकरण को प्रोत्साहन मिलेगा।
राष्ट्रीय डेटाबेस को मिलेगा और अधिक मजबूती
सरकार ने वर्ष 2023 में जन्म और मृत्यु के राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस को वैधानिक मान्यता प्रदान की थी। यही डेटाबेस भविष्य में विभिन्न सरकारी और निजी सेवाओं में पहचान के महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में उपयोग किया जाएगा।
किन कार्यों में जरूरी है जन्म प्रमाण पत्र?
जन्म प्रमाण पत्र आज कई सरकारी और निजी प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य दस्तावेज बन चुका है। इसका उपयोग—
- स्कूल एवं कॉलेज में प्रवेश
- पासपोर्ट बनवाने
- आधार कार्ड
- मतदाता सूची
- विवाह पंजीकरण
- ड्राइविंग लाइसेंस
- सरकारी नौकरी
- सामाजिक योजनाओं का लाभ
- अन्य सरकारी सेवाओं
में किया जाता है।
संसद में विपक्ष का हंगामा
विधेयक पर चर्चा के दौरान संसद में विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी की। हंगामे के बीच ही विधेयक को ध्वनिमत से पारित किया गया।
बहस का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि सरकार देश में प्रत्येक जन्म और प्रत्येक मृत्यु का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करना चाहती है। उनके अनुसार इससे सरकारी रिकॉर्ड अधिक सटीक होंगे और भविष्य में पहचान संबंधी विवादों को कम किया जा सकेगा।
आम नागरिकों पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश लोगों पर इस संशोधन का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, यदि वे समय पर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराते हैं। हालांकि जिन मामलों में वर्षों बाद पंजीकरण कराने की आवश्यकता पड़ती है, उन्हें अब अदालत से आदेश प्राप्त करना होगा।
इसलिए नागरिकों को सलाह दी जा रही है कि जन्म या मृत्यु होने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर ही पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

Deepak











