जयपुर। राजस्थान की टेराकोटा कला को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने वाले कलाकार चंद्र शेखर सैन को 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी 2026 में ललित कला अकादमी राष्ट्रीय अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्हें यह सम्मान उनकी टेराकोटा कृति ‘My Entire World - I’ के लिए दिया गया है। इस वर्ष राजस्थान से पुरस्कार पाने वाले वे एकमात्र कलाकार हैं।
ललित कला अकादमी की 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में देशभर के कलाकारों की बड़ी भागीदारी रही। अकादमी को 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 2,495 कलाकारों की 6,175 कलाकृतियां प्राप्त हुईं। इनमें से पहली ज्यूरी ने 270 कलाकृतियों को प्रदर्शनी के लिए चुना। इसके बाद दूसरी ज्यूरी ने 20 कलाकारों की 20 कृतियों का राष्ट्रीय अकादमी पुरस्कार के लिए चयन किया।
टेराकोटा को बनाया अपनी कला की पहचान
चंद्र शेखर सैन मुख्य रूप से टेराकोटा माध्यम में काम करते हैं। उनकी कला में राजस्थान की लोक और पुरातात्विक परंपराओं की झलक दिखाई देती है। खास तौर पर कालीबंगा और मोलेला जैसी कला परंपराओं से उन्हें प्रेरणा मिलती रही है। उनकी रचनाओं में प्रकृति, पक्षी, पशु, पेड़, बीज और जैविक आकृतियों जैसे विषय दिखाई देते हैं।
सैन ने टेराकोटा को केवल पारंपरिक शिल्प के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय समकालीन दृश्य कला के माध्यम के तौर पर भी इस्तेमाल किया है। उनकी कृतियों में परंपरा और आधुनिक कलात्मक अभिव्यक्ति का मेल देखने को मिलता है।
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‘My Entire World-I’ में क्या है खास?
राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुनी गई कृति ‘My Entire World-I’ टेराकोटा माध्यम में बनाई गई है और इसे मूर्तिकला श्रेणी में रखा गया है। ललित कला अकादमी की आधिकारिक सूची में चंद्र शेखर सैन की इस कृति को 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के 20 पुरस्कार विजेता कार्यों में शामिल किया गया है।
इस कृति के जरिए कलाकार ने अपने आसपास के संसार, प्रकृति और जीव-जगत से जुड़े विचारों को कलात्मक रूप देने का प्रयास किया है। सैन की कला में प्राकृतिक और जैविक रूपों की मौजूदगी उनके रचनात्मक दृष्टिकोण का अहम हिस्सा रही है।
पहले भी मिल चुका है राज्य स्तरीय सम्मान
चंद्र शेखर सैन को वर्ष 2014 में राजस्थान ललित कला अकादमी का राज्य कला पुरस्कार भी मिल चुका है। वे देश के अलग-अलग हिस्सों में 10 से अधिक एकल प्रदर्शनियां आयोजित कर चुके हैं और ललित कला अकादमी की राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भी हिस्सा लेते रहे हैं।
उनकी कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी प्रदर्शित किया जा चुका है। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के माध्यम से उन्होंने स्पेन के वलाडोलिड स्थित Casa de la India में अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई और वहां व्याख्यान भी दिया।
राष्ट्रीय प्रदर्शनी में 20 कलाकार सम्मानित
65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में इस वर्ष कुल 20 कलाकारों की कृतियों को ल

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