जयपुर में कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस संपन्न, ‘जयपुर घोषणा-पत्र 2026’ सर्वसम्मति से पारित

जयपुर में आयोजित कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस 2026 का समापन हुआ। सम्मेलन में ‘जयपुर घोषणा-पत्र 2026’ को अपनाया गया और मध्यस्थता, डिजिटल न्याय तथा विधि के शासन को

जयपुर में आयोजित कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस के समापन समारोह में शामिल न्यायविद और प्रतिनिधि।

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जयपुर में कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस का समापन, ‘जयपुर घोषणा-पत्र 2026’ पर बनी वैश्विक सहमति

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित तीन दिवसीय कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस-2026 का रविवार को समापन हो गया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सहित कई कॉमनवेल्थ देशों के न्यायाधीश, विधि विशेषज्ञ, वरिष्ठ अधिवक्ता और नीति-निर्माता शामिल हुए। सम्मेलन के दौरान शांति स्थापना, मध्यस्थता, न्याय तक आसान पहुंच और कानून के प्रभावी शासन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

 

समापन सत्र में सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि जयपुर घोषणा-पत्र 2026’ रही, जिसे सभी प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया। इस घोषणा-पत्र का उद्देश्य मध्यस्थता को अधिक प्रभावी, पारदर्शी, भरोसेमंद और आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाना है। साथ ही विभिन्न देशों के बीच सहयोग बढ़ाकर सीमा-पार विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को भी प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

न्यायिक व्यवस्था में तकनीक की भूमिका पर जोर

सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक तेज और पारदर्शी बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना था कि तकनीक आधारित समाधान न्याय तक पहुंच को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

 

मध्यस्थता को सामाजिक विश्वास का माध्यम बताया

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी मजबूत समाज की नींव आपसी विश्वास और शांति पर टिकी होती है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता केवल कानूनी विवादों का समाधान नहीं, बल्कि संवाद, सहयोग और सामाजिक विश्वास को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम भी है।

न्याययानडिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च

सम्मेलन के दौरान न्याययान डिजिटल वे ऑफ जस्टिस नामक सॉफ्टवेयर का भी शुभारंभ किया गया। इस पहल का उद्देश्य राजस्थान की अदालतों में पेपरलेस कार्यप्रणाली को बढ़ावा देना और न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक आधुनिक, पारदर्शी एवं दक्ष बनाना है। इस प्रणाली के जरिए बड़ी संख्या में न्यायालयों और न्यायिक अधिकारियों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।

प्रशिक्षण और शोध पर भी विशेष फोकस

सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि प्रभावी मध्यस्थता व्यवस्था के लिए प्रशिक्षित मध्यस्थों का मजबूत नेटवर्क विकसित करना आवश्यक है। इसके साथ ही अनुसंधान, क्षमता निर्माण और विभिन्न देशों के अनुभव साझा करने पर भी विशेष बल दिया गया, ताकि विवाद समाधान की प्रक्रिया अधिक प्रभावशाली बन सके।

जयपुर को मिला वैश्विक पहचान का अवसर

उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन राजस्थान और भारत की न्यायिक परंपरा को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि जयपुर घोषणा-पत्र 2026’ भविष्य में कॉमनवेल्थ देशों के बीच कानूनी सहयोग और मध्यस्थता व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

विदेशी न्यायाधीशों और कानूनी विशेषज्ञों ने भी सम्मेलन को उपयोगी बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण संवाद और मध्यस्थता अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा दे सकते हैं। उनके अनुसार, आने वाले वर्षों में जयपुर घोषणा-पत्र वैश्विक स्तर पर विवादों के वैकल्पिक समाधान और न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकता है।

 


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